23जेएनडी24: सीआरएसयू में कुलपति प्रो. रामपाल सैनी और अन्य सीएम प्रो. डॉ. राज नेहरू का स्वागत कर
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय की ओर से वीरवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला का मुख्य विषय आध्यात्मिक आयामों की खोज चेतना की ज्ञान शक्ति रहा जिसमें शिक्षा, चेतना और आध्यात्मिकता के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन हुआ।
मुख्य वक्ता एवं ओएसडी टू सीएम प्रो. डॉ. राज नेहरू ने कहा कि चेतना ही वास्तविक ज्ञान की मूल आधारशिला है। उन्होंने मैं शिव हूं की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिव कोई सीमित रूप नहीं, बल्कि शुद्ध चिति यानी परम चेतना हैं।
उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली में केवल जानकारी का संग्रह पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे जीवन में उतारना ही वास्तविक ज्ञान है। उन्होंने विज्ञान और आध्यात्मिकता को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए युवाओं को डिजिटल युग में मानसिक संतुलन हेतु ध्यान और आत्मचिंतन अपनाने की सलाह दी।
कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक युग में शिक्षा का दायरा केवल डिग्रियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा वही है जो व्यक्ति के मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास का आधार बने। उन्होंने पुस्तकालयों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय द्वारा ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में जिज्ञासा और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए सराहनीय हैं।
प्रो. राजवीर पराशर ने शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों की अनिवार्यता पर जोर दिया, वहीं डॉ. दिनेश दधीचि ने भाषा और साहित्य के माध्यम से चेतना को समझने का मार्ग बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तकों को अपना सच्चा मित्र बनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. सीमा गुप्ता, डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. अनिल कुमार मौजूद रहे।