संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू) में आयोजित तीन दिवसीय ‘अतुल्य भारत’ सांस्कृतिक महोत्सव का समापन बुधवार को हुआ। इसमें 225 लोक कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि को जीवंत कर दिया।
समापन समारोह के प्रथम सत्र में डॉ. प्रीतम सिंह, निदेशक, डॉ. बीआर. अंबेडकर स्टडीज सेंटर के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संबोधन में भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और सांस्कृतिक धरोहर की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कहा कि लोक कलाएं समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
द्वितीय सत्र में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, रेवाड़ी के कुलगुरु प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. रामपाल सैनी के प्रयासों की सराहना की
उत्तर प्रदेश की टीम ने कजरी लोक नृत्य प्रस्तुत किया जबकि मध्य प्रदेश के कलाकारों ने बधाई सहित अन्य लोक नृत्यों से समां बांधा। राजस्थान के कलाकारों ने कालबेलिया, भवाई और चरी नृत्य के साथ सूफी गायन प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
हिमाचल प्रदेश की टीम ने सिरमौरी नाटी और हरियाणा के कलाकारों ने फाग व रागनी के माध्यम से स्थानीय संस्कृति की झलक पेश की।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि ‘अतुल्य भारत’ महोत्सव ने देश की विविध लोक परंपराओं को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी देता रहा।