गांव फरैण कलां के तीन युवकों को सदर पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अखत्यार किया है। हाईकोर्ट ने वारंट अफसर की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए जींद के एसपी, एएसपी नरवाना और सदर थाना प्रभारी को पांच अगस्त से पूर्व हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। पीड़ित पक्ष के वकील ने वकील राकेश जांगड़ा ने यह जानकारी मीडिया को दी। गौरतलब है कि फरैण कलां गांव के किसी मामले में कथित समझौता होने के बावजूद तीन युवकों को सदर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और पांच दिनों तक कोई गिरफ्तारी नहीं दिखाई। जिससे क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने पुलिस पर अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगाई जिस पर कार्रवाई करते पिछले हुए 16 जुलाई को हाईकोर्ट के वारंट अधिकारी ने सदर थाना पर छापेमारी की और रिपोर्ट तैयार करके नागरिक अस्पताल में मेडिकल करवाया। परिजनों का कहना था कि तीनों युवकों को पिछले पांच दिनों से पुलिस अवैध रूप से हिरासत में रखे हुए थी जबकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था। फरैण कलां के राजेश, नरेंद्र, नरेश और महीपाल के खिलाफ तीन मई को सदर थाने में मामला दर्ज किया गया था। दोनों पार्टियों के बीच 9 मई को पंचायती समझौता हो गया था इसके बावजूद पुलिस के दबाव में 13 जुलाई को तीनों आरोपियों को सरेंडर करना पड़ा। परिजनों के अनुसार उसी दिन से तीनों युवकों को अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखकर मारपीट की जा रही थी। इसके चलते उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
वारंट अधिकारी ने 25 जुलाई को पेश की रिपोर्ट
अवैध रूप से गिरफ्तार युवकों के वकील राकेश जांगड़ा ने बताया कि वारंट अधिकारी की रिपोर्ट पेश होने के बाद हाईकोर्ट ने पांच अगस्त से पूर्व जींद के एसपी, एएसपी नरवाना और सदर थाना प्रभारी को अपना पक्ष रखने का आदेश दिया हैं।