डेंगू के संदिग्ध मरीजों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन इसे मानने को तैयार नहीं है। गैर आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक डेंगू से जिले में पांच मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
अब तक जिले में डेंगू के 191 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन इनमें मौत किसी की नहीं हुई है। हाल ही में कथिततौर पर डेंगू से मौत के दो मामले सामने आए हैं। इनमें परिजनों का कहना है कि मौत डेंगू से हुई जबकि स्वास्थ्य विभाग इसके कारण कुछ और ही बता रहा है। हालांकि दोनों ही मामलों में मरीज को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। अलेवा निवासी 40 वर्षीय बबली और खोखरी गांव निवासी 35 वर्षीय राकेश की मौत तेज बुखार से हुई है। दोनों ही परिवार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि यदि उनके मरीज की देखभाल हो जाती तो उनकी मौत नहीं होती।
केस एक
खोखरी गांव निवासी 35 वर्षीय राकेश खेतीबाड़ी कर अपने परिवार को पालता था। राकेश के भाई राजेश ने बताया कि 29 सितंबर को बुखार के चलते राकेश को जींद के सामान्य अस्पताल में दाखिल कराया गया। यहां एक दिन रखने के बाद उसे चिकित्सकों ने पीजीआई खानपुर रेफर कर दिया। जब मरीज के साथ खानपुर पहुंचे तो वहां उसकी प्लेटलेट्स 28 हजार तक गिर चुकी थी। यहां करीब एक घंटे तक राकेश का इलाज किया गया और फिर उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। रोहतक पीजीआई में इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। 29 सितंबर को लिए गए राकेश रक्त के नमूनों की रिपोर्ट दो दिन पहले आई है, जिसमें प्रशासन को झकझोर कर रख दिया। इसमें डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके बाद सात अक्तूबर को राकेश के घर के आसपास फॉगिंग भी कराई गई है।
केस नंबर दो
अलेवा निवासी राममेहर की 40 वर्षीय पत्नी बबली की मौत छह अक्तूबर को पीजीआई रोहतक में हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इसकी मौत भी डेंगू से होने की पुष्टि नहीं कर रहा है। बबली के पति राममेहर के अनुसार बुखार की शिकायत के चलते बबली को जींद के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया था। यहां से उन्हें बताया गया उसकी पत्नी को डेंगू है और उसे पीजीआई रोहतक ले जाओ। मरीज को रोहतक ले जाया गया। राममेहर के अनुसार वहां कोई देखभाल नहीं हुई। मौके पर मौजूद नर्स ने ब्लड के सैंपल तक लेने से मना कर दिया। इसके बाद 21 सितंबर की शाम उसे हिसार के निजी अस्पताल में ले गए। यहां के चिकित्सकों ने भी डेंगू बताते हुए उसे पीजीआई भेज दिया। राममेर के अनुसार दोबारा पीजीआई रोहतक गए और मरीज को दाखिल कराया गया। इस दौरान प्लेटलेट्स लगातार कम होती रही और 30 हजार तक पहुंच गई। तेज बुखार के कारण उसकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग का जवाब: डेंगू से नहीं हुई मौत
जिले में कोई भी मौत डेंगू से नहीं हुई है। खोखरी गांव निवासी मरीज को रेफर किया गया था, उसके बाद नहीं पता उसे कहां लेकर गए हैं और क्या इलाज हुआ है, हमने जो सैंपल लिए थे, उसमें डेंगू पॉजिटिव पाया गया है। मौत के कारण कुछ और भी हो सकते हैं। अलेवा निवासी महिला शुगर की मरीज थी और डेंगू से वह ठीक हो गई थी। बाद में शुगर के चलते उसकी मौत हुई है।
डॉ. आरएस तंवर, नोडल अधिकारी डेंगू।