जिले में स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों का दर्द कम करने की बजाए दर्द बढ़ा रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का पूरी तरह से जनाजा निकला हुआ है। यहां न तो मरीजों की जांच के लिए पर्याप्त उपकरण हैं और न ही उपचार के लिए चिकित्सक हैं। यहां फैली अव्यवस्थाओं के कारण जिले के लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले भर में स्वास्थ्य सेवाओं की हालात इतनी खराब हो चुकी है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के पांच माह के बावजूद भी अभी तक जिले के नागरिक अस्पताल में न तो एमआरआई की सुविधा शुरू हो पाई है और न ही यहां रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो पाई है। ऐसे में जिले के मरीजों को एमआरआई या अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए या तो निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर पीजीआई का रुख करने को मजबूर हैं। वहीं अगर चिकित्सकों के पदों की तरफ नजर डाली जाए तो आधे से ज्यादा पद चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। अकेले जींद के सामान्य अस्पताल में चिकित्सकों के 22 पद खाली पड़े हैं। 42 चिकित्सकों का काम महज 20 चिकित्सकों के कंधों पर टिका है। वहीं आपातकाल की सेवाएं भी महज दो ही चिकित्सकों के सहारे चल रही हैं। जबकि आपातकाल के लिए सात चिकित्सा अधिकारियों की जरूरत है। चिकित्सकों की कमी के चलते छोटी सी बीमारी के उपचार के लिए भी मरीजों को यहां घंटों इंतजार करना पड़ता है। जींद के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। चिकित्सकों के अनुसार एक मरीज को कम से कम पांच मिनट दी जानी चाहिए, लेकिन अधिक मरीजों के चलते सिर्फ दवा लिख दी जाती है।
इन-इन चिकित्सा विशेषज्ञों की है कमी
जिले के नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ, सामान्य रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, पैथलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, गाइनकोलाजिस्ट विशेषज्ञ की कमी है। वहीं आपातकाल के लिए भी सात चिकित्सा अधिकारियों की जरूरत है, लेकिन यहां महज दो ही चिकित्सा अधिकारियों के सहारे आपातकाल सेवाएं चल रही हैं।
सीएम की घोषणा के दो वर्ष बाद भी नहीं शुरू हो पाई एमआरआई की सुविधा
सत्ता में काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 26 दिसंबर 2014 को पहली बार जींद का दौरा किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राजकीय महिला कॉलेज में जनसभा को संबोधित करते हुए जल्द ही जिले के सामान्य अस्पताल में एमआरआई की सुविधा शुरू करवाने तथा रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की घोषणा की थी, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के दो साल बाद भी यहां पर न तो एमआरआई की सुविधा शुरू हो पाई है और न ही रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति।
मेडिकल करवाने के लिए पिछले तीन-चार दिन से अस्पताल के चक्कर काट रहा हूं, लेकिन चिकित्सक के मौजूद नहीं मिल पाने के कारण बिना मेडिकल के ही वापस जाना पड़ता है। पूछताछ करने पर पता चला कि मेडिकल के लिए एक ही चिकित्सक की ड्यूटी है और उसकी भी कोर्ट में तारीख होने के कारण वह कोर्ट में चला जाता है। समय पर मेडिकल नहीं हो पाने के कारण काफी परेशानी हो रही है।
- मोहित
नागरिक अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। उपचार के लिए मरीजों को लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। इसके बाद भी सही तरीके से उपचार नहीं मिल पाता है। इसके चलते सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और महिला मरीजों को होती है। क्योंकि लंबे समय तक वह लाइन में नहीं लग पाते हैं।
- टिंकू गोयल
अस्पताल स्वीकृत पद ड्यूटी पर खाली पद
नागरिक अस्पताल, जींद 42 20 22
पॉली क्लीनिक, जींद 03 00 00
नागरिक अस्पताल, नरवाना 42 06 38
नागरिक अस्पताल, सफीदों 15 05 10
सीएचसी, पीएचसी, उचाना 18 05 13
सीएचसी, पीएचसी, जुलाना 13 04 09
सीएचसी, पीएचसी, कालवा 15 05 10
सीएचसी, पीएचसी, कंडेला 11 01 10
सीएचसी, पीएचसी, खरकरामजी 11 05 06
सीएचसी, पीएचसी, उझाना 15 07 08
साढ़े 13 लाख की आबादी के जिले में महज एक सर्जन
जिला मुख्यालय पर स्थित नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी का आलम यह है कि साढ़े 13 लाख आबादी के जिले में सिर्फ एक सर्जन है। सर्जन डॉ. अनिल बिरला पर चिकित्सा अधीक्षक का कार्यभार होने के कारण काम का काफी दबाव है। इसके चलते मरीजों के ऑपरेशन के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
बीच में कुछ चिकित्सकों की बदली होने के कारण चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। चिकित्सकों की कमी को लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी को लेकर भी विभाग को पत्र लिखा गया है। विभाग द्वारा चिकित्सकों के कुछ पदों में बढ़ोतरी की गई है। विभाग की तरफ से चिकित्सकों की नियुक्ति के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
नागरिक अस्पताल, जींद