करीब 82 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमता 1200 किलोवाट है। यह एक बार में लगभग 2600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। ट्रेन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें यात्रियों को आरामदायक सफर के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलें। पिछले तीन माह से इस ट्रेन का विभिन्न रेल मार्गों पर सफल परीक्षण सफल रहने के बाद आज करोड़ो देशवासियों का इसे पटरी पर उतारने का सपना साकार हुआ।
तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए ट्रायल के दौरान ट्रेन के प्रदर्शन, गति, सुरक्षा और ईंधन प्रणाली की व्यापक जांच की गई। सभी परीक्षण सफल रहने के बाद इसे नियमित संचालन के लिए तैयार किया गया है। शुभारंभ के लिए हाइड्रोजन ट्रेन को दुल्हन की तरह सजाया गया है। ट्रेन और हाइड्रोजन प्लांट के शुभारंभ को लेकर जींद रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई हैं और स्टेशन परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
प्लांट में पानी से तैयार हो रही गैस
जींद में करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक हाइड्रोजन उत्पादन एवं री-फ्यूलिंग प्लांट भी स्थापित किया गया है। इसमें पानी से हाइड्रोजन गैस तैयार की जा रही है, जिसे ट्रेन में ईंधन के रूप में भरा जा रहा है। इससे ईंधन आपूर्ति की पूरी व्यवस्था पर्यावरण के अनुकूल बनेगी।
सुबह 10.30 बजे रवाना होगी ट्रेन
ट्रेन सुबह लगभग सवा 10.30 बजे जींद जंक्शन से रवाना होगी, जो जींद सिटी स्टेशन, पांडू-पिंडारा, ललितखेड़ा हाट, भंभेवा, ईसापुर खेड़ी हाट, बुटाना हाट, खंदराई हाट, गोहाना, राबरा हाट, लाठ हाट, मुहाना हरियाणा, बरवासनी हाट होते हुए सोनीपत दोपहर लगभग एक बजे पहुंचेगी। ट्रेन में अलग-अलग स्टेशनों से बच्चे सवार होंगे।
10 बजे पीएम मोदी पहुंचे जींद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को प्रधानमंत्री हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी देकर रवाना किया।
जानिए हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में
- दुनिया की सबसे सस्ते किराये वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन है। इसमें पांच रुपये में भी यात्रा कर सकेंगे। जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का किराया 25 रुपये होगा।
- दुनिया में सबसे कम लागत 82 करोड़ में बनी हाइड्रोजन ट्रेन।
- दुनिया की सबसे लंबी 10-कोच वाली ट्रेन है। इसमें दो पावर कार (इंजन) और आठ यात्री कोच हैं। जो करीब 1200 केवी की क्षमता का शक्तिशाली इंजन, 120 किमी. प्रति घंटा की गति से दौड़ने में सक्षम। फिलहाल 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।
-ट्रेन के कोच मेट्रो की तर्ज पर खुलेंगे और बंद होंगे। पूरी तरह दरवाजे बंद होने के बाद ही ट्रेन स्टेशन छोड़ेगी।
- हर कोच में बैठने के लिए 32 सीटें हैं
-सफर के दौरान पंखे और लाइट की व्यवस्था।
-हर कोच में डिस्प्ले लगा होने से आने वाले स्टेशन के बारे में पहले ही सूचना मिल जाएगी।
-सामान्य इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत यह ट्रेन अपने फ्यूल सेल और बैटरी सिस्टम से स्वयं बिजली बनाएगी। यह प्रदूषण मुक्त है। धुआं नहीं, भाप छोड़ेगी।
-इस ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्शन सिस्टम और गैस की निरंतर निगरानी जैसी उन्नत सुरक्षा तकनीकें शामिल हैं। आपात स्थिति में हाइड्रोजन की आपूर्ति अपने आप बंद हो जाएगी।