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Jind News: पोते-पोतियों का इंतजार कर रही थी दादी, खबर मौत की आई

Tue, 20 Jun 2023 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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लापरवाही ने ले ली एक ही परिवार के पांच लोगों की जान, बस से आते तो बच जाती जान

संवाद न्यूज एजेंसी

जींद। पानीपत मार्ग पर सफीदों फ्लाईओवर के पास मंगलवार की दोपहर हुई भीषण हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के बाद हिसार जिले के बरवाला हलका के गांव खरकड़ा में मातम छा गया। हादसे की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हादसे में जान गंवाने वाले बेटे, बहू और चार बच्चे पानीपत जिले के गांव रसूलपुर में गए थे। आठ दिन बाद उनके लौटने पर बिंदो देवी अपने बेटे-बहू और पोते-पोतियों का इंतजार कर रही थी। उन्हें क्या पता था कि एक पोती को छोड़ अन्य सभी कभी नहीं लौटेंगे। जब उन्हें हादसे की सूचना मिली तो वे बेसुध हो गई। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि राकेश अगर परिवार सहित बस से आता तो शायद यह हादसा न होता।

हादसे में मौत का ग्रास बने तीन बच्चे आठ दिन बाद अपने मामा के घर से आने वाले थे। मंगलवार को घर पहुंचने से पहले ही उनकी आवाज खामोश हो गई है। कई दिनों के बाद घर आ रहे पोते-पोतियों का उनकी दादी इंतजार कर रही थी। उनकी दादी रोते-रोते बोली कि गेट पर पहुंचने से पहले ही मुझे आवाज देते थे, लेकिन आज सब खामोश हो गए। इस दर्दनाक हादसे ने पूरा परिवार उजाड़ दिया। घर में केवल सात वर्षीय बच्ची सीरत उर्फ सीटू ही बची है, जो कि हादसे में घायल हुई है। वह हादसे के बाद से ही चुप है। उसे पता ही नहीं है कि उसके परिवार में अब कुछ नहीं बचा है। हादसे में एक परिवार के पांच लोगों की मौत से नागरिक अस्पताल में मौजूद हर कोई गमगीन था। यहां पहुंचे मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। इमरजेंसी वार्ड में भीड़ लगी हुई थी। बच्चे अरमान और राकेश का शव रखा हुआ था। कविता, किरण और अमित के शवों को शव गृह ले जाया गया।
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रिश्तेदारी में हुई थी दो की मौत, दोनों जगह गए थे परिवार के लोग



राकेश के ससुर की 10-12 दिन पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी, जिसकी रस्म पगड़ी सोमवार को थी। पिता रमेश की मौत के बाद राकेश की पत्नी कविता अपने चारों बच्चे किरण, अमित, सीरत उर्फ सीटू और अरमान को लेकर आठ दिन पहले मायके रसूलपुर गांव (पानीपत) चली गई थी। शोक प्रकट करने के लिए सोमवार को बाइक लेकर राकेश चला गया था, जहां से आते समय यह भीषण हादसा हो गया।
वहीं राकेश के भाई भीम के साढू सोनू की भी बीमारी के कारण मौत हो गई थी, जिसकी भी रस्म पगड़ी सोमवार की ही थी, जिसमें भीम, मां बिंदो, पत्नी रानी और बेटा जयभगवान गए थे। मंगलवार को वह भी शोक प्रकट कर बस में सवार होकर वापस आ रहे थे। जैसे ही वह सफीदों के पास पहुंचे तो उन्हें मोबाइल फोन पर सूचना मिली कि राकेश के पूरे परिवार की दुर्घटना में मौत हो गई।

बाइक पर छह सदस्यों के साथ दो बड़े बैग भी थे
इस हादसे का मुख्य कारण लापरवाही भी है, क्योंकि एक बाइक पर बच्चों समेत छह सदस्य सवार थे, जबकि बड़े-बड़े दो बैग भी थे। राकेश अगर परिवार सहित बस से आता तो यह हादसा नहीं होता, लेकिन उसने पूरे परिवार को अपने साथ बाइक पर बैठा लिया। बच्चे भी खुशी-खुशी पापा के साथ जाने के चक्कर में बाइक पर बैठ गए। फिर बाइक पर अपने गांव खरकड़ा के लिए चल पड़े, लेकिन निर्जन गांव से निकलते ही यह हादसा हो गया।



हादसे से सबक ले प्रशासन

जींद-पानीपत मार्ग की हालत बेहद खस्ता है। इस सड़की की हालत बेहद खस्ता है। पीडब्ल्यूडी बीएंडआर पैचवर्क कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। इस हादसे से प्रशासन को सबक लेना चाहिए। माजरा खाप पंचायत जींद ने इस सड़क के निर्माण में देरी के चलते एतराज जताया है। प्रेस प्रवक्ता समुद्र सिंह फोर के अनुसार स्थानीय विधायक भी इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, क्योंकि जींद की एकमात्र इस सड़क को लावारिस हालत में छोड़ा गया है। अखबारों में बार-बार सड़क चौड़ीकरण के बयान विधायक छपवाते हैं। पिछले पांच साल से बयानबाजी हो रही है। यह सड़क वाहनों के चलने लायक नहीं है।


जींद में चार साल में हुए चार बड़े हादसे

जींद में पिछले चार साल में चार बड़े हादसे हुए। इनमें 21 लोगों की मौत हो चुकी है। सितंबर 2019 को जींद के रामराय गांव के पास आर्मी की भर्ती से लौट रहे 10 युवकों की हादसे में मौत हो गई थी। यह युवक ऑटो में सवार होकर जींद आ रहे थे। सभी युवक जींद जिले के रहने वाले थे। इसके अलावा मई 2022 में कंडेला गांव के पास भी बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें छह की मौत और 17 लोग घायल हुए थे। सभी एक ही परिवार के थे और हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित करके लौट रहे थे। एक हादसा रधाना गांव के पास जनवरी 2023 में हुआ था, जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी। वह पार्टी करने के बाद बाइकों पर जींद शहर की तरफ आ रहे थे।

एंबुलेंस दिए जाने को लेकर हुई तकरार
हादसा होने पर पुलिस कर्मचारी नागरिक अस्पताल में पहुंचे। पुलिस कर्मचारियों ने रेफरल मैनेजर से एंबुलेंस भेजने की बात कही, लेकिन उन्होंने हादसे में मौत के बाद एंबुलेंस भेजने का नियम नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि केवल घायलों को लाने के लिए एंबुलेंस का प्रयोग किया जाता है। काफी देर तक पुलिस अधिकारी रेफरल मैनेजर से उलझते रहे और गुहार लगाते रहे। काफी समय बाद एंबुलेंस भेजी गई।
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रेफरल ट्रांसपोर्ट के डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. विनोद ने कहा कि जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया तुरंत एंबुलेंस को मौके पर भेज दिया। नियमानुसार एंबुलेंस को केवल घायलों के लिए भेजा जाता है। फिर भी किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो मामले की जांच करवाई जाएगी।





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