जींद। मांडो खेड़ी गांव में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की नई पेयजल प्रबंधन एवं रखरखाव नीति-2026 को लागू करने के लिए आयोजित ग्राम सभा को ग्रामीणों का समर्थन तो मिला लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक सफल नहीं हो सकी।
हालांकि ग्राम पंचायत सदस्यों, ग्राम जल एवं सीवरेज समिति और ग्रामीणों ने नई नीति में सहभागिता को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। विभाग अब दोबारा ग्राम सभा आयोजित कर योजना को लागू करने की तैयारी में जुट गया है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जिला सलाहकार रणधीर मताना ने बताया कि नई नीति को अमलीजामा पहनाने के लिए दोबारा ग्राम सभा बुलाई जाएगी।
ग्राम सभा में रणधीर मताना ने ग्रामीणों को बताया कि विभाग की नई नीति के तहत पेयजल आपूर्ति के प्रबंधन और रखरखाव में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। गांव के लोग स्वयं पेयजल व्यवस्था का संचालन करेंगे और पाइप लाइन लीकेज जैसी समस्याओं का समाधान भी स्थानीय स्तर पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि रखरखाव के लिए तैयार किए जाने वाले एस्टीमेट की एक चौथाई राशि अग्रिम रूप से ग्राम पंचायत को दी जाएगी। यह राशि ग्राम पंचायत के नए इंडियन बैंक खाते में जमा होगी जिससे पेयजल व्यवस्था से जुड़े कार्य कराए जाएंगे।
इसके अलावा गांव के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला पेयजल बिल एकत्रित करेगी और यह राशि भी पेयजल प्रबंधन एवं रखरखाव पर खर्च की जाएगी। विभाग ने ग्रामीणों से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए नई व्यवस्था में सक्रिय सहभागिता बढ़ाने की अपील की।
घर-घर जाकर की पेयजल आपूर्ति की जांच
विभाग की संयुक्त टीम में सरपंच अनिल लाठर, ग्राम सचिव संजीव, नितिन, ग्रामीण नरेश, सतबीर व जयकरण ने गांव में घर-घर जाकर पेयजल आपूर्ति की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर स्चच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए क्लोरिन की जांच की और विद्यार्थियों को जल संरक्षण व स्वच्छता के बारे में बताया।