जींद। हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान कृष्ण नैन, प्रवक्ता रामनिवास खरकभूरा ने बताया कि कर्मचारियों और मजदूर नेताओं ने काफी लंबे संघर्ष के बाद श्रम कानून बनवाए थे, लेकिन अब केंद्र की सरकार इन्हें खत्म करने पर तुली हुई है। श्रम कानून में सुधार के नाम पर वर्षों से लड़ाई लड़कर प्राप्त अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है। अन्याय को किसान संगठनों ने भी महसूस किया और उनके अधिकारों की लड़ाई का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि बुधवार को आयोजित संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में फैसला लिया गया कि 16 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने कर्मचारी व मजदूर विरोधी चार लेबर कोड को वापस लेने के साथ-साथ किसानों को एमएसपी, निजीकरण, पूंजीवाद ज्वलंत मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल होगी। रामनिवास ने कहा कि चार श्रम कानूनों को वापस लेने, निजीकरण, ठेका प्रथा, पुरानी पेंशन को बहाल करवाने, हिट एंड रन कानून वापस लेने, पंजाब के समान वेतन, सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करवाने, कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने जैसी मांगों को लेकर यह हड़ताल की जा रही है।