सफीदों। गीता कॉलोनी स्थित मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा के कारागृह में हुए अलौकिक जन्म व गोकुल में मनाए गए जन्मोत्सव का वर्णन किया गया।
इस अवसर पर बधाई गीत गाए गए और श्रद्धालुओं ने बधाई गीतों पर जमकर नृत्य किया। स्वामी परम मुक्तानंद महाराज भिक्षु: ने झूमते हुए श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। कथा संयोजक सत्यनारायण मित्तल ने स्वामी परम मुक्तानंद महाराज भिक्षु: व कथा व्यास स्वामी विनोद कृष्ण महाराज का माल्यार्पण करके अभिनंदन किया गया।
स्वामी विनोद कृष्ण महाराज ने कहा कि द्वापर युग में कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। इस दौरान योगमाया से कारागार की सुरक्षा में तैनात सिपाही बेहोश हो गए थे। इस दौरान तेज बारिश की वजह से बाढ़ आ गई थी।
उनके पिता वासुदेव ने उन्हें कंस से बचाने के लिए टोकरी में विराजमान करके यमुना नदी पार करवाकर गोकुल के नंदभवन में पहुंचाया था। यात्रा के दौरान यमुना महारानी बालकृष्ण के पैर छूना चाह रही थी। इसी कोशिश में नदी का पानी ऊपर उठने लगा। इसके बाद बालकृष्ण ने अपना पैर टोकरी से निकालकर बाहर रखा। यमुना उनके चरण छूकर नीचे आ गई।
उन्होंने कहा कि भक्त के प्रेम में तो भगवान जेल में भी चले जाते हैं। जो भगवान का आश्रय ले लेता है तो भगवान उसकी हर राह आसान कर देते हैं। कलयुग में भगवत कथा के सुनने से ही जीवन में कल्याण संभव हो सकता है, क्योंकि आदमी इस युग में जितना ज्यादा भगवान की भक्ति में लीन रहेगा, उतना उसको अपनी आत्मा में शांति का एहसास होगा।