जींद। असमर्थ महिला कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक पंडित रामनिवास अहिरका ने गायत्री यज्ञ के बाद अपने विचार रखते हुए कहा कि किसी व्यक्ति से उसकी क्षमता से अधिक की अपेक्षा करना मूर्खता है। कई बार व्यक्ति को समझाने के बजाय उसकी मनोदशा और उद्देश्य को समझना अधिक जरूरी होता है।
उन्होंने इस बात को नारद-शिव संवाद और गुरु-चेले की कथा के माध्यम से समझाया। अहिरका ने बताया कि नारद ने भगवान शिव से पूछा था कि रावण उनका परम भक्त था फिर उन्होंने उसे सीता को भगवान राम को लौटाने और उनसे विरोध न करने के लिए क्यों नहीं समझाया। इसके जवाब में शिव ने गुरु-चेले की कथा सुनाई।
कथा के अनुसार गुरु और चेला गंगासागर स्नान के लिए गए थे। वहां एक पट्टिका पर समुद्र में डूब रहे व्यक्ति को बचाने पर 500 रुपये और मृत व्यक्ति की लाश निकालने पर एक हजार रुपये इनाम देने की बात लिखी थी। गुरु को दो मिनट तक सांस रोककर गोता लगाने की कला आती थी। उसने चेले को भिक्षा मांगने के बजाय दो मिनट तक डूबने का नाटक करने और इनाम पाने की सलाह दी।
गुरु समुद्र में उतरकर डूबने का नाटक करने लगे और दो मिनट बाद चेले से निकालने को कहा। चेला तैयार नहीं हुआ। गुरु ने इनाम में आधे रुपये देने की बात कही लेकिन चेला नहीं माना। उसने बताया कि लाश निकालने पर एक हजार का इनाम लिखा है। यह सुन गुरु उसकी नीयत समझ गया और समुद्र से बाहर आ गया। संवाद