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Jind News: गोसेवा के नाम पर नंदीशाला के बाहर बेचा जा रहा बाजार से अधिक रेट चारा

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जींद। नंदीशाला के बाहर पुण्य के नाम पर चारे का स्टॉल लगाने वाले लोग गाय को चारा खिलाने वालों को चूना लगा रहे हैं। इन लोगों ने पुण्य के नाम पर कमाई का जरिया बना लिया। गोवंश का पेट नहीं भर पाने का एक यह भी कारण है। इन लोगों को नंदीशाला प्रबंधन कमेटी ने यहां जगह मुहैया करवाई थी, ताकि नंदीशाला में चारा दान करने आने वाले लोगों को यह लोग सस्ता चारा मुहैया करवाएंगे, लेकिन अब यह लोग बाजार से ज्यादा भाव में चारा बेच हैं, जिस समय इन लोगों ने स्टॉल लगाया था, उस समय कहा था कि यह 100 रुपये प्रतिदिन नंदीशाला में दान की रसीद भी कटवाएंगे, लेकिन अब न तो यह रसीद कटवा रहे हैं और न ही चारा सस्ता दे रहे हैं। नंदीशाला प्रबंधन कमेटी ने अब इन लोगों को यहां से उठाने की योजना बनाई है, ताकि सस्ता चारा बेचने वालों को यह लोग जमीन मुहैया करवा सकें ताकि लोग अधिक से अधिक चारा गायों को दान कर सकें।
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श्री जयंती देवी मंदिर के सामने बनी अस्थाई नंदीशाला के आगे स्टॉल लगाने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है, लेकिन वह गोवंश का पेट भरने की बजाय अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं, क्योंकि वह शहर के भाव से डेढ़ रुपये प्रति किलोग्राम ज्यादा राशि में हरा चारा बेच रहे हैं। जो भी व्यक्ति नंदीशाला में चारा दान करने आता है, वह इन्हीं स्टॉल से चारा खरीदता है। इस कारण पैसे अधिक लगते हैं और चारा कम आता है। अन्य बाजार की बात करें तो वहां पर हरे चारे का भाव तीन से साढ़े तीन रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता है, लेकिन अस्थाई नंदीशाला के बाहर लगे स्टॉलों पर साढ़े चार रुपये से पांच रुपये प्रति किलोग्राम तक हरा चारा बेचा जा रहा है। यह स्टॉल संचालक गोशाला की रसीद तक नहीं कटवाते, जबकि इन्होंने कहा था कि वह हर माह तीन हजार रुपये की रसीद कटवाकर गोशाला में दान करेंगे। जब यह नंदीशाला शुरू हुई थी तो उस समय केवल एक-दो स्टॉल ही थे, लेकिन अब यहां स्टॉलों की संख्या 16 पहुंच गई है।
सुनंदी गोशाला के बाहर एक भी नहीं स्टॉल
अस्थाई नंदीशाला के बाहर स्टालों की भरमार है, क्योंकि यहां काफी लोग गोवंश को चारा डालने के लिए आते हैं, जिससे स्टॉल वालों की अच्छी आमदनी होती है। वहीं सुनंदी गोशाला के बाहर एक भी स्टॉल नहीं है। उसका एक कारण है कि वहां शहर के कम लोग ही जाते हैं। पिछले दिनों एक स्टॉल सुनंदी गोशाला के बाहर लगाया गया था। यहां हरा चारा खरीदने के लिए कम ही लोग पहुंच रहे थे। ऐसे में स्टॉल संचालक का खर्च भी पूरा नहीं हो रहा था।
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हरे चारे के मनमाने रुपये वसूले जा रहे
गऊ सेवा दल के सदस्य सोमबीर पांचाल ने कहा कि अस्थाई नंदीशाला के बाहर लगे स्टॉल संचालक मनचाहे रुपये वसूल रहे हैं। वह प्रति किलो हरे चारे के पांच रुपये तक लेते हैं, जबकि मार्केट में प्रति किलो का भाव तीन से साढ़े तीन रुपये तक है। ऐसे में नंदीशाला के सामने बैठे स्टॉल संचालक हरे चारे के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं।
इन टाल वालों पर रोक लगाए प्रशासन
टीम जींद सुधार के सदस्य सुनील वशिष्ठ ने कहा कि गोवंश की आड़ में जेब भरने का काम हो रहा है। प्रशासन को स्टॉल संचालकों पर रोक लगानी चाहिए। स्टॉल संचालकों को चाहिए कि वह मार्केट भाव के अनुसार ही लोगों से रुपये लें। इसलिए स्टॉल संचालकों को सोचना चाहिए कि वह भी पुण्य के भागीदार बनें।
स्टॉल संचालक हरे चारे के नाम पर मनमानी राशि वसूल रहे हैं। यह नंदीशाला के बाहर कब्जा किए हुए हैं और गोशाला को चंदा तक नहीं देते। पिछले दिनों हुई बैठक में यह तय हुआ था कि गोशाला के बाहर बैठे स्टॉल संचालकों को वहां से हटाया जाएगा, जो बाजार भाव के अनुसार चारा देगा, उसको रखा जाएगा। इसके अलावा सुनंदी गोशाला के बाहर भी एक स्टॉल प्रबंधन की तरफ से लगवाया जाएगा, ताकि वहां गोवंश को हरा चारा मिल सके।
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-स्वामी राघवानंद, अध्यक्ष, गोशाला कमेटी, जींद
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