जींद। जिले में सोमवार को सात वर्षीय बच्ची समेत डेंगू के पांच और मरीज मिले हैं। अब तक जिले में डेंगू का आंकड़ा 69 पर पहुंच गया है। वहीं चिकनगुनिया का भी एक मरीज मिलने से आंकड़ा 10 पर पहुंच गया हैं। अब तक यह मामले शहरी क्षेत्रों में ज्यादा थे लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्र में भी इनकी संख्या बढ़ने लगी है।
स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन जिले में मिल रहे डेंगू व चिकनगुनिया के संक्रमण के मामलों को रोकने के लिए ज्यादा मेहनत करनी होगी हालांकि अब तक जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ जहां पर लारवा मिल रहा है। उन मकान मालिकों को नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।
जिले में अब तक 2500 के करीब लोगों को अपने आसपास साफ सफाई करने व लारवा को खत्म करने के लिए नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद भी यह स्थिति नहीं रुक पा रही। सोमवार को कारखाना गांव में 58 वर्षीय महिला, बहादुरगढ़ गांव में 55 वर्षीय व्यक्ति, रोजला गांव में 20 वर्षीय युवक व शहर के ओमनगर में सात वर्षीय बच्ची व हकीकत नगर में 50 वर्षीय महिला डेंगू से संक्रमित मिली है।
वहीं ओमनगर कॉलोनी में एक बुजुर्ग चिकनगुनिया से संक्रमित मिला। लोगों की लापरवाही के कारण डेंगू का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते मामलों को रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चुनौती बनी है। अगर इस पर अभी नियंत्रण नहीं हुआ तो यह आंकड़ा खतरनाक स्तर पर जा सकता है।
फील्ड में 200 से ज्यादा टीमें
स्वास्थ्य विभाग की 200 से ज्यादा टीमें डेंगू व मलेरिया को रोकने के लिए काम कर रही हैं। इसके बावजूद इसके मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अगर गांवों व शहर के वार्डों में हर व्यक्ति साफ सफाई का ध्यान रखे तो इस पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में डेंगू व चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं। वहां पर अब स्वास्थ्य विभाग लार्वा को खत्म करने के लिए फॉगिंग करवाएगा।
यह हैं डेंगू के लक्षण
डेंगू में लक्षण उम्र पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर संक्रमित मच्छर द्वारा किसी व्यक्ति को काटने के चार से सात दिनों के भीतर बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। इसमें तेज बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में गंभीर दर्द, सिरदर्द, लाल चकत्ते जो छाती, पीठ या पेट से शुरू होकर अंगों और चेहरे तक फैल जाते हैं। आंखों के पीछे दर्द, मतली, उल्टी व दस्त लगते हैं।
वर्जन
जिले में डेंगू के मामले अब तक 69 हुए हैं। इनकी रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जहां पर भी डेंगू व मलेरिया के मामले मिलते हैं। वहां पर लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा बीमार लोगों के रक्त के सैंपल लिए जा रहे हैं। -डॉ. बिजेंद्र ढांडा, नोडल अधिकारी मलेरिया