निडाना गांव में पशुओं के मरने का सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहा। इसी क्रम में मंगलवार को पांच और पशुओं की मौत हो गई। इससे ग्रामीण दहशत में हैं। हालांकि दो दर्जन चिकित्सकों की टीम पशुओं का इलाज कर रही है, लेकिन पशुओं की लगातार हो रही मौतों से गांव के लोग सकते में हैं। मंगलवार को लाजपत राय पशु विश्वविद्यालय हिसार के चिकित्सकों की टीम गांव में पहुंची और मृत पशुओं का पोस्टमार्टम किया। अब रिपोर्ट आने के बाद ही पशुओं के मौत का कारणों पता चल सकेगा। गौरतलब है कि संदिग्ध बीमारी से निडाना गांव में शनिवार से अब तक 19 पशुओं की मौत हो चुकी है। अधिकतर मौत गांव के एक पशु तालाब मंगोलवाला में पानी पीने वाले पशुओं की ही हुई हैं। सोमवार रात भर चिकित्सकों की टीम ने पशुओं का इलाज जारी रखा। फिलहाल करीब तीन दर्जन पशु बीमार हैं और पशुपालन विभाग ने पूरे गांव के पशुओं का निरीक्षण कर रही हैं।
पांच टीमें करेंगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. आरएस मलिक मंगलवार को गांव पहुंचे और उन्होंने पूरे गांव के पशुओं की जांच करने का कार्यक्रम तैयार किया। इसके तहत पांच टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में पशुओं की जांच करेंगी और एक टीम रिजर्व रहेगी, जो रात को किसी भी स्थिति से निपटेगी।
पशु तालाबों से लिया सैंपल
हिसार से आई चिकित्सकों की टीम ने मंगलवार को गांव के सभी पशु तालाबों से पानी का सैंपल लिया है। इसकी जांच हिसार स्थित विश्वविद्यालय की लैब में की जाएगी। इसके बाद ही पानी की स्थिति साफ होगी।
अब पशुओं के सामने पेयजल का संकट
फिलहाल पशुपालन विभाग के चिकित्सकों की सलाह पर ग्रामीणों ने तालाब में पशुओं को पानी पिलाना बंद कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही पशुओं के लिए पेयजल का संकट भी खड़ा हो गया है। दरअसल पिछले करीब एक सप्ताह से गांव के जलघर से पानी सप्लाई नहीं हो रहा। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि वे खेतों के ट्यूबवेल से पानी लाकर पशुओं को पिला रहे हैं।
नहीं हुआ क्लोरीनेशन
ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक भी प्रशासन ने गांव के पशु तालाब के पानी की सफाई के लिए कुछ नहीं किया है। जबकि प्रशासन सोमवार को क्लोरीनेशन की बात कह रहा था।
एक सप्ताह बाद आएगी रिपोर्ट
मंगलवार को चिकित्सकों ने तीन मृत पशुओं का पोस्टमार्टम किया है और सभी बीमार पशुओं के रक्त के नमूने लिए हैं। बीमार पशुओं के मुंह से गिर रही लार के नमूने भी जांच के लिए एकत्रित किए गए हैं। हिसार से पहुंचे डॉ. नरेश जिंदल के अनुसार एक सप्ताह में सभी रिपोर्ट आएंगी और इसके बाद ही बीमारी के बारे में स्थिति साफ होगी।
पशु पर रखें नजर
हालांकि अभी बीमारी के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन पशुपालकों को सावधान रहने की जरूरत है। गांव के तालाबों में पशुओं को पानी नहीं पिलाएं। पशुओं की लगातार निगरानी रखें और अस्वस्थ दिखने पर चिकित्सकों से संपर्क करें। बीमार पशु को अलग रखें। इससे बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है।
- डॉ. नरेश जिंदल, चिकित्सक, लाजपत राय विवि हिसार।
मंगलवार को तीन कटड़ों सहित एक भैंस की मौत हुई है। एक भैंस की मौत किसी और कारण से हुई है। सोमवार शाम भी एक भैंस की मौत हो गई थी। चिकित्सकों की टीम लगातार काम कर रही है और स्थिति नियंत्रण में है।
- डॉ. आरएस मलिक, उप पशुपालन निदेशक।
मामले पर प्रशासन पूरी तरह नजर बनाए हुए है। पशुपाल विभाग के महानिदेशक ने भी दो अधिकारियों को गांव भेजा है। हिसार से टीम आई हुई है। पानी की जांच के लिए सैंपल लिए हैं और इसकी रिपोर्ट आने से पहले क्लोरीनेशन को रोका गया है। गांव में पानी सप्लाई में यदि कोई दिक्कत है तो उसे तुरंत ठीक करवाया जाएगा।
- विनय सिंह, डीसी।