जिले के इतिहास में पचास साल के बाद रविवार को सीआर किसान कालेज में भव्य जैन भागवती दीक्षा महा-महोत्सव का आयोजन हुआ।
रविवार को पटियाला चौक हकीकत नगर श्रीएसएस जैन सभा द्वारा आयोजित सामूहिक दीक्षा महोत्सव में विधिवत रूप से जैन मुनियों के सानिध्य में वैरागन प्रसिद्धी जैन, वैरागी हार्दिक जैन तथा वैरागी जयबीर जैन ने सामूहिक रूप से दीक्षा ली। दीक्षा लेने से पूर्व तीनों वैरागियों को पूरी तरह से दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया गया था।
कार्यक्रम में शामिल विभिन्न राज्यों के युवा, महिलाएं पुरूषों ने बेटी बचाने-बेटी पढ़ाने का संकल्प भी लिया। सामूहिक दीक्षा महोत्सव के लिए 21 दिसंबर से केसर रस्म, मेहंदी रस्म आयोजित की जा रही थी।
दीक्षा कार्यक्रम में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बतौर मुख्यातिथि तथा हिसार के विधायक डॉ. कमल गुप्ता ने विशेष अतिथि के तौर पर शिरकत की। इसके अलावा कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान, ओमप्रकाश जैन, बचन सिंह आर्य भी मौजूद रहे। जैन समाज द्वारा कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
महोत्सव के दौरान जैन मुनियों द्वारा प्रस्तुत भजनों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने महोत्सव में पहुंचे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने देश को जीओ और जीने दो तथा अंहिसा परमोधर्मों का संदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि जैन समाज सभी जातियों का समाज है।
उन्होंने कहा कि आज इस सामूहिक दीक्षा कार्यक्रम में जिन तीन आत्माओं ने दीक्षा ली है, वह अब अपने सांसारिक सुखों को त्याग कर समाज के हित के लिए कार्य करेंगे। हुड्डा ने कहा कि वह परिवार धन्य हैं, जिन परिवारों में समाज हित के लिए कार्य करने वाली ऐसी महान आत्माएं जन्म लेती हैं।
विशेष अतिथि विधायक डॉ. कमल गुप्ता ने कहा कि त्याग व तपस्या के मामले में जैन समाज की कोई बराबरी नहीं है।
समाज के लिए सबसे ज्यादा त्याग जैन समाज के लोग करते हैं। जैन समाज के मुनियों का जीवन बहुत कठिन हैं।
वैरागी जयबीर जैन दीक्षा के लिए 2004 से कर रहा था प्रयास
सोनीपत जिले के फाजिलपुर निवासी 32 वर्षीय वैरागी जयबीर जैन ने घर-गृहस्ती को त्याग कर रविवार को सीआर किसान कालेज में हुए सामूहिक दीक्षा कार्यक्रम में दीक्षा ली। वैरागी जयबीर जैन ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से जैन मुनियों के संपर्क में रहा।
वर्ष 2004 में रोहतक में उसने पहली बार वैराग्य के लिए प्रयास किया और लगभग चार माह तक जैन मुनियों की सेवा की लेकिन परिवार के सदस्य उसके वैराग्य में बाधा बन गए। उसके बाद भी उसने कई बार प्रयास किए लेकिन अब जाकर उसे वैराग्य हासिल करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
अब उसने अपनी पत्नी व परिवार के सदस्यों की सहमति से ही दीक्षा ली है। इस दौरान वैरागी जयबीर जैन की पत्नी ने उसके एक बेटे को भी समाज के लिए समर्पित करने का संकल्प भी किया।
छोटे बीज में छिपा होता है बड़ा वट वृक्ष : हार्दिक जैन
दिल्ली निवासी 14 वर्षीय हार्दिक जैन ने दीक्षा से पूर्व अपने संबोधन में कहा कि बचपन से ही वैराग्य के प्रति उसकी भावना थी। जब वह तीन वर्ष का था तो घर में रखी उसके सांसारिक चाचा जैन मुनि शिवेंद्र मुनि की तस्वीर को देखकर उनके पास जाने की जिद करता था।
उसकी जिद को देखते हुए उनके माता-पिता ने उसे शिवेंद्र मुनि के पास भेज दिया और पिछले छह वर्षों से वह उनके साथ ही रहता है लेकिन उसकी दीक्षा लेने की इच्छा आज पूरी हुई है। नन्हे वैरागी हार्दिक जैन ने कहा कि लोग उसकी उमर को नहीं देखें बल्कि उसके अंदर वैराग्य के लिए उमड़ रहे जोश को देखें।
हार्दिक ने उदाहरण देते हुए कहा कि वैसे तो बीज भी छोटा होता है लेकिन उसके अंदर भी एक बड़ा वट वृक्ष छिपा होता है।
साढ़े तीन साल से वैराग्य के लिए कर रही थी प्रयास : वैरागी प्रसिद्धी
बड़ौदा निवासी 14 वर्षीय वैरागन प्रसिद्धी जैन ने कहा कि जिस तरह प्यासे को पानी का इंतजार रहता है, वैसे ही वैराग्य के लिए उसे भी बड़ी बेसबरी से इंतजार था।
वह साढ़े तीन साल से वैराग्य के लिए प्रयास कर रही थी लेकिन परिवार उसके वैराग के रास्ते में बाधा बन रहा था। साढ़े तीन वर्ष के बाद आज उसका प्रयास सफल हो पाया है। आज परिवार की सहमति से उसने वैराग्य लिया है।
दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया गया वैरागियों को
रविवार को सीआर किसान कॉलेज में आयोजित सामूहिक दीक्षा समारोह के दौरान वैराग लेने वाले जयबीर जैन, हार्दिक जैन तथा प्रसिद्धी जैन को पूरी तरह से दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया गया था।
श्रद्धालुओं द्वारा तीनों वैरागियों के गले में नोटों की मालाएं डाली जा रही थी। पिछले कई दिनों से दीक्षा लेने वालों की मेहंदी तथा केसर रस्म भी करवाई गई थी। सभी रस्में पूरी करवाने के बाद तीनों वैरागियों के वस्त्र बदलवाकर उन्हें जैन मुनियों द्वारा विधिवत रूप से दीक्षा दिलवाई गई।