उचाना। उचाना उपमंडल कार्यालय में चल रहे धरने पर शुकवार को धरना संयोजक आजाद पालवां की अध्यक्षता में मीटिंग हुई। मीटिंग में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि कंगना रनौत को थप्पड़ जड़ने वाली सीआईएसएफ कांस्टेबल कुलविंदर कौर की रिहाई के बाद उसे उचाना धरने पर बुलाकर सम्मानित करेंगे।
आजाद पालवां ने कहा कि जो कुलविंद्र कौर के थप्पड़ की गूंज पूरी दुनिया के अंदर गई है, इस थप्पड़ की चर्चा पूरे भारत देश, पूरी दुनिया हुई। कंगना रनौत अब भी जो बयान दे रही कि उग्रवाद, आंतकवाद को बढ़ावा देने के लिए ये लोग कार्यवाही कर रहे है, जबकि देश के अंदर पूरी शांति है। आज भी उनकी जुबान पर कंट्रोल नहीं। कुलविंदर कौर की भावनाओं को ठेस पहुंची थी। किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना, किसी की मां-बाप को गाली देना सही तो कुछ भी नहीं।
हम कुलविंदर कौर के पक्ष में खड़े है, उसको सल्यूट भी करते हैं। गलत बयानबाजी करने वाले जो राजनेता हंै उनको सबक सिखाने का काम किया। राजनेताओं ने अपनी जुबान पर कंट्रोल नहीं किया तो देश में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। एक क्रांति का आगाज हो चुका है। राजनेताओं को भी अपनी जुबान कंट्रोल करनी चाहिए। 13 महीने आंदोलन चला उस दौरान किसानों को कभी आंतकवादी, मावोवादी, खालिस्तानी पता नहीं क्या-क्या कहा गया।
बैठक में फैसला लिया है कि कुलविंदर कौर जैसे ही जेल से रिहा होकर आएंगी तो उसको उचाना धरने पर बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। सरकार को चेतावनी भी देते है कि कानून से बाहर आकर इस बेटी के खिलाफ कोई भी कार्यवाही की तो सहन नहीं होगी।
किसान नेत्री सिक्किम सफा खेड़ी ने कहा कि कंगना रनौत ने किसान आंदोलन के दौरान कहा था कि जो धरने पर किसान, मजदूरों की महिलाएं बैठी हैं वो 100-100 रुपये लेकर आई हैं। ऐसे बयान देकर हिंदुस्तान की मां-बहन का अपमान करने का काम किया था। सरकार से मांग करते हंै कि बकायदा जो कुलविंदर कौर की नौकरी थी उसको उस नौकरी के ऊपर रखा जाए। किसानों को लेकर कंगना ने जो बयान दिए वो सांसद बनने के लिए थे, ताकि वह पीएम नरेंद्र मोदी की निगाह में आए। इस अवसर पर शीला छात्तर, बीरा करसिंधु, पाला बड़ौदा, मिया सिंह दरोली, पवन मोर, रामफल, बलिंद्र, जंगीर, टेकराम, मेवा, जोधाराम मौजूद थे।
07जेएनडी15: धरने पर पहुंचे विभिन्न गांवों के लोग। संवाद