संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। तकनीकी खामियां, साइट बंद होना, फसल के डाटा में गड़बड़ी और नमी के नाम पर कटौती ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंगलवार को फसल बेचने पहुंचे किसानों को मंडी गेट पर ही रोक दिया गया जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें मंडी गेट से मुख्य सड़क तक लग गईं।
घंटों इंतजार के बाद मंडी में प्रवेश नहीं मिलने पर किसानों ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए ही भटकना पड़ रहा है। गेट पास के नाम पर उन्हें मंडी गेट पर न रोका जाए। उनकी फसल को मंडी में उतरवाया जाए।
नादंल गांव के किसान राजकपूर ने बताया कि वह करीब डेढ़ घंटे से मंडी गेट पर खड़े हैं। साइट बंद होने के कारण उन्हें मंडी में प्रवेश नहीं मिला। किसानों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन पोर्टल चालू नहीं होता तब तक फसल की एंट्री संभव नहीं है।
छान्या गांव के किसान अजमेर ने बताया कि करीब दो घंटे इंतजार के बाद वह मंडी के अंदर गेहूं से भरी ट्रॉली लेकर पहुंचे लेकिन वहां बायोमीट्रिक सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इसक कारण उनकी खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
कैरखेड़ी गांव के किसान जयभगवान ने बताया कि उन्होंने सवा दो एकड़ में गेहूं की बिजाई की थी और पोर्टल पर पंजीकरण भी कराया था। उनकी फसल करीब 60 क्विंटल हुई लेकिन मंडी में गेट पास पर केवल 25 क्विंटल की दिखाई गई। जमीन की फर्द दिखाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि बूंदाबांदी के चलते खुले में खड़ी ट्रॉलियों में रखी गेहूं की फसल भीगने का खतरा बना हुआ है। नमी बढ़ने पर खरीद के दौरान कटौती और अधिक कर दी जाती है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
12 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर प्रति प्रतिशत एक किलो प्रति क्विंटल के हिसाब से कटौती की जा रही है। इस तरह 4 से 5 किलो प्रति क्विंटल तक की कटौती हो रही है जो किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बन रही है।
मंडी में व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए
किसानों ने कहा कि साइट को सुचारू रूप से चलाया जाए। फसल के डाटा में गड़बड़ी को तुरंत ठीक किया जाए और नमी कटौती के नियमों में पारदर्शिता लाई जाए। साथ ही मंडी में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर किसानों को राहत दी जाए ताकि उन्हें अपनी मेहनत की फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंडी की वास्तविक स्थिति
शहर की अनाजमंडी में गेटपास और बायोमीट्रिक की प्रक्रिया से गुजरने के बाद किसान के सामने नमी के नाम पर कटौती की जाती है। आढ़तियों की दुकानों पर मशीनों से नमी की जांच की जा रही है और निर्धारित मानकों के अनुसार कटौती की जा रही है। इसमें जितने प्रतिशत नमी मिलती है। एक प्रतिशत पर एक किलोग्राम के हिसाब से कटौती की जा रही है।
वर्जन
हरियाणा में सर्वर डाउन होने के कारण लगभग 35 मिनट तक गेट पास जारी नहीं हो सके। इसके बाद मुख्यालय स्तर पर बात कर मैन्युअल गेट पास काटकर किसानों को मंडी में प्रवेश दिया गया। इनकी ऑनलाइन प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी। नमी कटौती को लेकर उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है और किसानों को सलाह दी गई है कि वे गेहूं को सुखाकर ही मंडी में लाएं ताकि आते ही फसल बेची जा सके।
-संजीव कुमार, मार्केट कमेटी सचिव जींद।
07जेएनडी10: सर्वर डाउन होने के बाद गेट पास नहीं कटने से मुख्य सड़क तक लगी अनाजमंडी में ट्रालियो
07जेएनडी10: सर्वर डाउन होने के बाद गेट पास नहीं कटने से मुख्य सड़क तक लगी अनाजमंडी में ट्रालियो
07जेएनडी10: सर्वर डाउन होने के बाद गेट पास नहीं कटने से मुख्य सड़क तक लगी अनाजमंडी में ट्रालियो