08जेएनडी30: बिजली निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे किसान। संवाद
जींद। नौगामा खाप के गांवों में बिजली समस्या व लंबित बिजली कनेक्शनों को जारी करने की मांग को लेकर किसानों ने हांसी रोड पर स्थित बिजली निगम के पावर हाउस के बाहर जयबीर राजपुरा की अध्यक्षता में सोमवार को धरना दिया।
भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में सुबह 10 से दोपहर बाद साढ़े 3 बजे तक किसानों का धरना चला। किसानों ने पावर हाउस के गेट पर ताला जड़ने की चेतावनी दी तो प्रशासन हरकत में आया और चार ट्रांसफार्मर उपलब्ध करवाए। साथ ही सिंसर गांव में बिजली के पोल लगाने का काम शुरू किया गया। निगम के एक्सईएन ने जल्द ही काम पूरा करवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने धरना खत्म कर दिया।
सोमवार को भाकियू के जिला प्रधान बारूराम, युवा जिला प्रधान बिंद्र नंबरदार, प्रदेश प्रवक्ता छज्जूराम, जयबीर राजपुरा, रामफल जागलान, प्रदीप घिमाना समेत काफी संख्या में किसान हांसी रोड पर वीटा प्लांट के नजदीक बने पावर हाउस के गेट पर एकत्रित हुए। यहां पर किसानों ने बिजली निगम के खिलाफ नारेबाजी की और धरना शुरू कर दिया। किसान नेताओं ने कहा कि वर्ष 2019-20 से किसानों के बिजली कनेक्शन लंबित हैं। सिंसर, गुलकनी तथा राजपुरा भैण में किसानों ने दो से ढाई लाख रुपये सिक्योरिटी जमा करवाई थी, लेकिन उनको बिजली कनेक्शन मिला न ट्रांसफार्मर। न ही अब तक बिजली के पोल लगवाने का काम शुरू करवाया गया। इसके अलावा खेतों की बिजली सप्लाई सुचारू नहीं चल रही। कभी आधे तो कभी एक घंटे का कट लग रहा है। बिजली के तार जर्जर हालत में हैं। दिनभर में तीन से चार घंटे बिजली सप्लाई मिल पाती है, जो कि धान की रोपाई के लिए काफी कम है। उन्होंने कहा कि वह अपनी इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से एसडीओ से लेकर एक्सईएन तक मिले, लेकिन किसी ने नहीं सुना।
किसानों ने कहा कि ट्रांसफार्मर का लोड नहीं बढ़वाया जा रहा। किसानों के धरना शुरू करने और गेट बंद करने की चेतावनी के बाद एक्सईएन विकास मलिक मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद चार ट्रांसफार्मर दिलवाए गए। सिंसर गांव में विभाग की टीम भेजकर खंभे लगवाने का काम शुरू करवाया गया। इस पर किसानों ने धरना समाप्त कर दिया और चेतावनी दी कि अगर जल्द से जल्द सारी मांगें पूरी नहीं की गई तो वह दोबारा से धरना शुरू करेंगे। इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
08जेएनडी30: बिजली निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे किसान। संवाद