जींद। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने कहा कि किसान तिलहन फसलों की अच्छी पैदावार के लिए डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) की बजाय एसएसपी यानी सिंगल सुपर फॉस्फेट अथवा एनपीके का इस्तेमाल करें। इस खाद के इस्तेमाल से सरसों के तेल व वजन की मात्रा बढ़ती है। फसल की चमक में भी इजाफा होता है। इसके अलावा सर्दी के प्रकोप से बचाने के लिए यह खाद कारगर है।
उन्होंने बताया कि सरसों एक तिलहन फसल है, इसलिए इसके बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को एसएसपी खाद का प्रयोग करना चाहिए। बुवाई से पूर्व एसएसपी का प्रयोग न केवल पौधे की उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि यह फसल की गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी करता है। वहीं गेहूं की फसल में दाने का साइज व उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एनपीके का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसान आज भी सरसों व गेहूं की फसल के लिए डीएपी खाद पर निर्भर हैं, जबकि बाजार में इनकी तुलना में कम दाम पर बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं।
उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील करते हुए कहा कि बाजार में उपलब्ध इस किफायती व बेहतर विकल्प का लाभ अवश्य उठाएं। उन्होंने कहा कि कोई भी खाद व दवा विक्रेता अगर खाद-बीज लेते समय किसानों को जबरदस्ती अन्य खाद, बीज या कोई पदार्थ देता है तो इसकी शिकायत कृषि विभाग कार्यालय में करें।
एनपीके और एसएसपी खाद का इस तरह करें प्रयोग
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरिश नागपाल ने बताया कि किसान सरसों की बिजाई के लिए एक एकड़ में 50 किलो डीएपी यानी एक कट्टा खाद का प्रयोग करते हैं, जिसमें 46 प्रतिशत फास्फेट व 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। यह खाद जमीन में जल्दी घुलनशील होती है, इसलिए बीज के अंकुरण के समय पौधे को इसका कम लाभ मिलता है। एसएसपी के एक कट्टे में 15.8 प्रतिशत फॉस्फेट व सल्फर की मात्रा 11 व कैल्शियम की मात्रा 20 प्रतिशत होती है। चूंकि एसएसपी में नाइट्रोजन की मात्रा शून्य है, इसलिए इसकी पूर्ति के लिए हम एसएसपी के साथ यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं। एक एकड़ में डीएपी के एक कट्टे की तुलना में हमें बुवाई से पूर्व एसएसपी के दो कट्टे का प्रयोग करना होगा। इससे एक एकड़ में फॉस्फेट की मात्रा करीब 31 प्रतिशत हो जाएगी।