संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। फसलों का पंजीकरण करवाने में जिले के किसानों की रुचि नहीं है, जिसके चलते अब तक बिजाई की गई फसल का 47 प्रतिशत ही किसानों ने पंजीकरण करवाया है। कृषि विभाग की टीमें लगातार फसल पंजीकरण करवाने को लेकर किसानों को जागरूक कर रही हैं। इसके बावजूद किसान फसलों का पंजीकरण करवाने के लिए आगे नहीं आ रहे। इसके चलते अब तक जिले में 2,53,840 एकड़ फसल का पंजीकरण हुआ है।
जिले में 5,85,208 एकड़ में विभिन्न तरह की फसल की बिजाई की हुई है, लेकिन किसान पंजीकरण करवाने के लिए आगे नहीं आ रहे। इसके चलते अब तक 32,174 किसानों ने फसल पंजीकरण करवाया है। यह कुल रकबे 5,85,208 एकड़ का 47 प्रतिशत है। कृषि विभाग ने शत प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक गांव में विभागों के कर्मचारियों के माध्यम से शिविर भी लगाए हैं। इसके अलावा मुनादी भी करवाई जा रही है। इसमें किसानों को कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से शत प्रतिशत रकबे में बिजाई की गई फसल का पंजीकरण 10 अगस्त तक करवाने के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं।
बिना पंजीकरण करवाए नहीं मिलेगा फसल में हुए नुकसान का मुआवजा
क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण करवाने के लिए फसल का मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। भविष्य में फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा लेने के लिए किसान को क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। विभाग की किसी भी स्कीम पर अनुदान लेने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना आवश्यक है।
जो किसान अपने पूरे रकबे में बिजाई की गई फसल का पंजीकरण मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर करवाएगा, उस किसान को प्रदेश सरकार 100 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में देगी। बहुत से किसान पोर्टल पर करवाए जाने वाले पंजीकरण को केवल फसल बेचे जाने से जोड़कर देखते हैं, जो सही नहीं है। यह किसी भी प्रकार की विभागीय स्कीम का लाभ प्राप्त करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेची जाने वाले फसल और फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी जरूरी है।
-डॉ. गिरीश नागपाल, उप निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।
सरकार ने 100 प्रतिशत रकबे में बिजाई की गई फसल का पंजीकरण मेरी फसल-मेरा ब्पोरा पोर्टल पर करवाने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण करवाने के अंतिम तिथि 10 अगस्त निर्धारित की हुई है। इसलिए किसान अपने गांव में स्थित कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर अपनी फसल का पंजीकरण करवाएं।
-डॉ. मनोज कुमार, डीसी जींद।