अनाज मंडी में मंगलवार को धान की सरकारी खरीद को लेकर किसानों और सरकारी खरीद एजेंसी के खरीदारों के बीच हंगामा गया। गुस्साए किसानों ने सरकारी खरीद एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में मामले की सूचना मिलने पर मार्केट कमेटी सचिव मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाबुझा कर शांत करवाया।
जिला प्रशासन द्वारा अनाज मंडियों में किसानों की धान की फसल की खरीद के लिए अलग-अलग खरीद एजेंसियां नियुक्त की गई हैं। मंगलवार को शहर की नई अनाज मंडी में धान की फसल की खरीद की जिम्मेदारी हरियाणा एग्रो कारपोरेशन की थी।
मंगलवार को हरियाणा एग्रो कारपोरेशन के अधिकारी फसल की खरीद के लिए मंडी पहुंचे, लेकिन यहां पर खरीद एजेंसी के अधिकारियों द्वारा कई दुकानों को छोड़ बोली की शुरुआत की गई। इस पर आढ़तियों ने एतराज जताया। इसके बाद खरीदारों ने धान की सरकारी खरीद शुरू की तो उन्होंने धान की इन ढेरियों में कमियां निकाल कर इन्हें खरीदने से साफ मना कर दिया।
खरीद एजेंसी के अधिकारियों के इस रवैये से किसानों का गुस्सा फुट पड़ा। किसानों ने सरकारी खरीदारों पर आरोप लगाए कि सरकारी खरीदार जानबूझकर बहाना बनाते हुए इसे खरीदने से मना कर देते हैं और बाद में वो काफी सिफारिशों पर सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल से कम भावों पर इसकी खरीद करते हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी धान की खरीद करने सरकारी खरीद एजेंसी का कोई जिम्मेदार अधिकारी आने की बजाय चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी अथवा निजी मिल का नौकर खरीद करता है।
किसानों द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिलने पर मार्केट कमेटी सचिव संजीव कुमार मौके पर पहुंचे। मार्केट कमेटी सचिव ने किसानों को कहा कि अनाज मंडी के अंदर धान की सरकारी खरीद में किसी भी किस्म की कोई गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी। वे खुद उनकी फसल की खरीद पर अपनी नजर बनाए रखेंगे।