जींद। बागवानी विभागकिसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बेमौसमी सब्जियां उगाने के लिए लो टनल पर विधि अपनाने पर अनुदान दे रहा है। जींद जिले में एक लाख वर्ग मीटर लो टनल लगाने का लक्ष्य विभाग को मिला है। इसमें एक एकड़ में अलग-अलग तरह से लो टनल लगाने पर 50 से 60 हजार रुपये किसान का खर्च आता है। इस पर प्रति एकड़ 50 प्रतिशत राशि का अनुदान विभाग दे रहा है। इच्छुक किसान विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
बागवानी विभाग का लक्ष्य है कि अगेती किस्म की सब्जियां किसान लो टनल विधि से उगाएं। अगेती किस्म की सब्जियों के मंडी में ज्यादा रेट मिलेंगे, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। इस योजना का लाभ एक किसान 2.5 एकड़ पर ही ले सकते हैं।
यह होता है लो टनल
लो टनल पॉली हाउस का ही छोटा रूप होता है। इसमें कम ऊंचाई पर दो-तीन महीने के लिए अस्थायी संरचना बना कर सब्जियों की खेती की जाती है। यह तकनीक पॉली हाउस से काफी सस्ती है। हरी सब्जियों की अगेती खेती के लिए लो टनल बनाई जाती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर सर्दियों में किया जाता है। पॉली हाउस की तरह लो टनल में खेती करने पर फसल दो-तीन महीना पहले ही पककर तैयार हो जाती है। इससे किसानों को जल्दी-जल्दी फसलें उगाने और दोगुना पैसा कमाने का मौका मिलता है। लो टनल में चप्पन कद्दू, लौकी, खीरा, करेला और खरबूज-तरबूज जैसे बेलदार फल सब्जियों की खेती कर सकते हैं। इसमें सिंचाई के लिए सिर्फ टपका सिंचाई पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इसमें बागवानी विभाग टपका सिंचाई यंत्रों पर भी अनुदान देता है।
कैसे लगता है लो टनल
प्लास्टिक की लो टनल बनाने के लिए 6 से 10 मीटर मोटी और 2 से 3 मीटर लंबी तार या सरिया लिया जाता है। इसके अलावा किसान चाहें तो लोहे के सरिये की जगह बांस की बल्लियों का प्रयोग भी कर सकते हैं। सरिया या बांस की बल्लियों के सिरों को तार से जोड़कर मिट्टी में गाड़ देते हैं। जिससे ढ़ाई से तीन फीट तक ऊंचाई बन जाती है। सरिया और बल्लियों पर लगे तारों की दूरी कम से कम 2 मीटर होनी चाहिए। अब इस ढांचे को 25 से 30 माइक्रोन मोटाई वाली पारदर्शी पॉलीथिन से ढका जाता है।
किसान योजना का लाभ लेने के लिए करें आवेदन
बागवानी विभाग के किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए लो टनल विधि से अगेती सब्जियां उगाकर महंगे दामों में बेच सक तेम हैं। इसके लिए बागवानी विभाग किसानों को प्रोत्साहित कर रही है, लो टनल विधि अपनाकर खेती करने से किसान का जो खर्च आता है। उसका 50 प्रतिशत खर्च बागवानी विभाग किसान को दे रहा है। इसके लिए किसान विभाग में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
-विजय पान्नू, जिला उद्यान अधिकारी जींद।