उचाना(जींद)। मांगों को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम तय करके आंदोलन कर रहे किसान संगठनों को एक मंच पर लाने के लिए हरियाणा के खाप चौधरी, किसान संगठन आगे आए हैं। सर्वजातीय दाड़न खाप पालवां चबूतरे पर शनिवार को हुई महापंचायत में प्रदेश भर से विभिन्न खापों, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अध्यक्षता सर्वजातीय दाड़न खाप प्रधान सूरजभान घासो ने की। मंच संचालन संयुक्त रूप से आजाद पालवां, रामपाल झील ने किया।
सूरजभान घासो ने कहा कि महापंचायत में सर्वसम्मति से 12 सदस्यों की तालमेल कमेटी बनाई गई। इसमें अलग-अलग खापों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। यह तालमेल कमेटी संयुक्त किसान मोर्चा की छह सदस्यों की कमेटी के साथ-साथ जो संगठन संयुक्त किसान मोर्चा से बाहर हैं, उनसे भी मिलेगी। जो संगठन किसानों को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम तय करके आंदोलन कर रहे हैं, उन सबसे मिलकर इनमें तालमेल बनाने का काम ये कमेटी करेंगी। 55 खापों के प्रतिनिधि, 25 किसान संगठनों के पदाधिकारी इस महापंचायत में पहुंचे।
तीन घंटे तक चली इस महापंचायत में गिरफ्तार किसानों को जल्दी से जल्दी रिहा करने, जो मामले किसानों पर दर्ज हुए हैं उनको रद्द करने की के प्रस्ताव पास करके सरकार से मांग की। पंजाब के किसान शुभकरण की मौत पर दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गई।
तालमेल कमेटी में इनको किया गया शामिल
हुड्डा खाप से प्रदीप हुड्डा, देशवाल खाप से संजय देशवाल, सतरोल खाप से सतबीर सिंह डीपीई, किताब सिंह मोर नरवाना, नांदल खाप से ओमप्रकाश, ईश्वर सिंह जाबा, दाड़न खाप से दलबीर श्योकंद, बिनैन खाप से ईश्वर नैन, दलाल खाप से कैप्टन मान सिंह दलाल, सूबे सिंह समैन, कलकल खाप से राजपाल कलकल, देशवाल खाप से संजय को शामिल किया। आजाद पालवां ने बताया कि गिरफ्तार किसानों को रिहा करने, किसानों पर दर्ज मामले रद्द करने की मांग के प्रस्ताव पारित महापंचायत में किए गए। 12 सदस्यों की तालमेल कमेटी बनाई गई जो जल्द संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त किसान मोर्चा से बाहर जो किसान संगठन है उनसे मिलेंगी। जो किसान संगठन अलग-अलग ऐलान आंदोलन को लेकर करते हैं, उन्हें एक साथ लाने का काम किया जाएगा ताकि जो आंदोलन वो संगठित होकर हो।
संगठित होकर लड़नी होगी लड़ाई
वक्ताओं ने कहा कि सरकार तानाशाही कर रही है। किसानों की मांग, मुद्दों को हल नहीं करना चाहती है। किसान की मांगों को सरकार मानने का काम करें। एमएसपी पर गारंटी कानून, कर्ज माफ सहित अन्य जो मांगे है वो पूरी की जाए। सरकार की वादाखिलाफी के चलते ही किसानों को दोबारा से आंदोलन करना पड़ रहा है। सरकार अगर अपने वायदे से नहीं मुकरती तो किसानों को आंदोलन नहीं करना पड़ता। सरकार की मंशा आंदोलन एक राज्य, एक जाति का बनाने की है लेकिन ये आंदोलन पूरे देश के किसानों के लिए है। ये मांगे एक राज्य के किसानों के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए है। सरकार इस तरह की मंशा छोड़ कर किसानों की मांगों को मानने का काम करें।
वक्ताओं ने कहा कि बैरिकेडस लगाकर किसानों को दिल्ली जाने से रोकना बिल्कुल गलत है। इंटरनेट जो बंद किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ व्यापार भी प्रभावित हुआ। इससे हर किसी को परेशानी होती है। संगठित होकर अपने हक की लड़ाई लड़े तो निश्चित रूप से जीत मिलेंगी। सभी संगठनों को चाहिए कि वो आपस में तालमेल बनाए। सभी संगठनों का आपस में तालमेल बनाने के लिए ये महापंचायत हुई है।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर बलबीर बड़ौदा, फूल कुमार पेटवाड़, रोहताश उझाना, कर्मबीर सिंह, डॉ. प्रीतम सिंह धमतान, रघुबीर नैन, अमरजीत कुंडू, जोगिंद्र नैन, मा. बलबीर सिंह, जोरा सिंह शिमला, रणबीर समैन, मा. बलजीत सिंह, राममेहर बुडायन, अनूप प्रधान खेड़ा खाप, जियलाला ढूंढवा, छज्जूराम कंडेला, सुभाष बड़सिकरी, रघुबीर बालू, राजा डूमरखा, चांदीराम ककड़वासरा, रामधन घसो, बलिंद्र उचाना कलां, मनोज एडवोकेट, अमरजीत खटकड़, लीला सेढ़ा माजरा, जोधाराम सेढ़ा माजरा, जंगीर पालवां, मिया सिंह दरोली, मा. बलवान श्योकंद मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन
02जेएनी40: दाड़न खाप पालवां चबूतरे पर आयोजित महापंचायत में पहुंचे लोग। संवाद
02जेएनडी41: महापंचायत में विचार रखते हुए वक्ता। संवाद
फोटो कैप्शन
02जेएनी40: दाड़न खाप पालवां चबूतरे पर आयोजित महापंचायत में पहुंचे लोग। संवाद
02जेएनडी41: महापंचायत में विचार रखते हुए वक्ता। संवाद