जींद। जिले के 12 गांवों के किसान एनएच-152डी और दिल्ली कटरा एक्सप्रेस वे के पास प्रस्तावित आईएमटी के विरोध में शुक्रवार को करीब 150 ट्रैक्टरों पर सवार होकर जींद पहुंचे। किसानों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना 30 हजार एकड़ जमीन पोर्टल पर अपलोड हुई है। उन्होंने सरकार पर उनकी जमीन चोरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने आईएमटी के प्रस्ताव को तुरंत रद्द करने की मांग की। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन होगा।
शुक्रवार को 12 गांवों के किसानों ने आईएमटी के खिलाफ प्रदर्शन के बाद डीसी मोहम्मद इमरान रजा को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने गोहाना रोड पर लघु सचिवालय परिसर के बाहर काफी देर तक धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
किसानों का कहना था कि रातों रात बिना सहमति के जमीन पोर्टल पर भी चढ़ जाती है और डिमांड राशि भी तय कर दी जाती है जबकि किसानों ने कोई डिमांड की ही नहीं। किसानों की एक ही मांग है कि उनको किसी भी कीमत पर जमीन नहीं बेचनी है। सरकार और प्रशासन की मंशा ठीक नहीं है।
किसान राजेश नगूरां, सोनू दलाल, सुदीप मलिक, विकास मलिक, राहुल अलेवा, भूप नगूरां, राजबीर अलेवा, करतार लोहान, राजेंद्र लोहान ने कहा कि जिले के किसानों को सरकार की आईएमटी नहीं चाहिए। इसमें सरकार ने उन किसानों के पुनर्वास का कोई प्रावधान नहीं किया है जो बिना जमीन के भूमिहीन हो जाएंगे।
उनका कहना है कि इन जमीनों से केवल किसानों और उनके परिवारों का ही पेट नहीं भरता है बल्कि हजारों मजदूरों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी भी चलती है। किसानों की जमीन गई तो हजारों लोग अपनी रोजी-रोटी खो बैठेंगे और यह किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ भी हो जाए, वह अपनी जमीन नहीं देंगे। जमीन के लिए वह अपनी जान तक देने के लिए तैयार हैं।
बैरिकेट लगाकर की रोकने की कोशिश
पुलिस ने परशुराम चौक पर बैरिकेट लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की। इसके बाद जैसे ही किसानों के ट्रैक्टर पहुंचे तो वहां पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा लेकिन किसानों ने ट्रैक्टर नहीं रोके और वह लघु सचिवालय के बाहर ट्रैक्टरों के साथ पहुंच गए।
शुरू से ही चल रहा आईएमटी का विरोध
पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने जींद में आईएमटी बनाने की घोषणा की थी। इसको लेकर दिल्लूवाला, खरकगादिया, मोहम्मद खेड़ा, ढाठरथ, बनियाखेड़ा, जामनी, अरावली खेड़ा, खांडा, नगूरां, गोइया, अलेवा, मांडी और हसनपुर गांव में जमीन अधिकृत की जानी थी लेकिन इन गांवों के किसानों ने इसका विरोध किया और कहा कि वह अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। उनका कहना है कि इन गांवों की जमीन उपजाऊ है। इससे प्रतिवर्ष लाखों टन गेहूं और धान उपजाकर देश में अन्न के भंडार किसान भरता है।
जमीन अपलोड करने की होगी जांच
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने किसानों का मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लिया। उन्होंने कहा कि ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेज दिया जाएगा। डीसी ने यह भी कहा कि किसानों की जमीन पोर्टल पर किसानों की सहमति के बिना अपलोड करने के आरोपों की जांच करवाई जाएगी।
19जेएनडी15-गोहाना रोड से लघु सचिवालय ट्रैक्टरों पर पहुंच रहे किसान। संवाद
19जेएनडी15-गोहाना रोड से लघु सचिवालय ट्रैक्टरों पर पहुंच रहे किसान। संवाद
19जेएनडी15-गोहाना रोड से लघु सचिवालय ट्रैक्टरों पर पहुंच रहे किसान। संवाद