जींद। असमर्थ महिला कल्याण न्यास के संस्थापक पंडित रामनिवास अहिरका ने नरवाना रोड पर गायत्री यज्ञ के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि परमात्मा के संसार में केवल चेतन कहलाने वाले प्राणी ही सक्रिय नहीं, जड़ कहलाने वाली समस्त प्रकृति भी क्रियाशील है। सूर्य की किरणें करोड़ों मील दूर सूर्य से चलकर पृथ्वी पर हमें उचित मात्रा में ऊर्जा और रोशनी देती हैं।
उन्होंने कहा कि सूर्य की गर्मी से समुद्रों का जल गर्म होकर ऊपर उठता है और आकाश में हवा के वेग से बादल बनकर दूर-दूर तक वर्षा करता है। इससे पृथ्वी पर तरह-तरह के वृक्ष, वनस्पतियां, अन्न, फल, सब्जियां और औषधियां उत्पन्न होती हैं, जो प्राणी संसार के जीवन निर्वाह चलाने के काम आती हैं। कहीं-कहीं पर वही बादल पहाड़ों पर बर्फ के रूप में जमकर सूर्य की गर्मी से पृथ्वी पर दूर-दूर तक नदियों के रूप में बहता हुआ वर्षा के अभाव में सूखे खेतों और प्राणियों की प्यास बुझाता है। इस प्रकार जल भी मानव जीवन का मुख्य साधन है और परमात्मा ने इसके लिए पृथ्वी पर बड़े-बड़े समुद्र की रचना की है। यदि पृथ्वी पर कहीं जल नहीं होता तो पृथ्वी पर कहीं भी प्राणी संसार का जीवन संभव नहीं होता।