जींद। बौद्धिक अक्षमताओं वाले वयस्कों की बदलती ज़रूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाएं। उनकी मदद करके आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना चाहिए। उनमें चिंता और अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों का खतरा अधिक होता है। ये बात राज्य पुनर्वास, प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान, रोहतक के सहायक प्रो. एवं विशेषज्ञ डॉ. राजवीर सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने भिवानी रोड पर दर्पण रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर में भारतीय पुर्नवास परिषद् नई दिल्ली की ओर से आयोजित बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के वयस्कता और पारिवारिक मुद्दे विषयक तीन दिवसीय जोनल लेवल सतत् पुर्नवास शिक्षा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। निदेशक डॉ. आशुतोष ने मुख्य अतिथि डॉ. राजवीर सिंह का स्वागत किया।
इस कार्यक्रम में बौद्धिक अक्षमता पीड़ित व्यक्तियों के जीवन के वयस्कता संबंधित पहलुओं और पारिवारिक समर्थन की भूमिका आदि पर मंथन होगा। इसमें कई प्रदेशों से प्रतिभागी शामिल होंगे। विशेषज्ञ डॉ. राजवीर सिंह ने कहा कि बौद्धिक अक्षमता दिव्यांग वयस्क को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
उनके लिए आवश्यक समर्थन, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, सामाजिक अलगाव और देखभाल करने वालों पर बोझ आदि की मुख्य चिंताए हैं। उनके परिवारों को भी भावनात्मक और व्यावहारिक समर्थन की जरूरत होती है। समुदाय-आधारित आवास, डे-केयर सेंटर और अन्य सेवाएं वयस्कों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान कर सकती हैं।
रिसोर्स पर्सन डॉ. बलराज, मीनू शर्मा आदि ने कहा कि बौद्धिक अक्षमता और चुनौतीपूर्ण व्यवहार वाले वयस्कों की देखभाल एक दोहरी वास्तविकता को दर्शाती है। इस अवसर पर दर्पण सोसायटी के सदस्य डॉ. राजेश्वर, अर्चना, डॉ. आशुतोष, कोऑर्डिनेटर अमित, सहायक डॉ. नरेंद्र सिंह, लेक्चरर दीप्ति, मीनू शर्मा, रितु, मुख्तियार सिंह, ऑडियोलॉजिस्ट वरुण गर्ग, साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनीष, विशेष शिक्षक भारती, प्रमोद, सुनैना मौजूद रहे।