जींद। हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ की बैठक रोडवेज वर्कशाप स्थित कार्यालय में हुई। इसमें संगठन के पदाधिकारियों ने एक हजार किलोमीटर स्कीम की बसों के संचालन का विरोध किया गया। इस व्यवस्था से पंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाकर इसे वापस लेने की मांग की गई।
इस अवसर पर वरिष्ठ उपप्रधान कुलदीप पाबड़ा, महासचिव जगदीप लाठर, मुख्य संगठन सचिव सुधीर अहलावत मौजूद रहे। उपप्रधान संदीप रंगा ने कहा कि सरकार ने बजट में एक हजार किलोमीटर स्कीम की बसों को विभाग में शामिल करना एक पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना व विभाग को निजीकरण की तरफ ले जाना है। राज्य प्रधान आजाद गिल ने कहा कि सरकार को चाहिए की विभाग में किलोमीटर स्कीम की बसों को न शामिल करके जनहित को देखते हुए रोडवेज की बसों को शामिल किया जाए। जब से किलोमीटर स्कीम की बसों का संचालन हुआ है तब से अनट्रेंड चालकों की वजह से हादसों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिस कारण रोडवेज का नाम काफी बदनाम हो रहा है। रोडवेज ने तो ईंधन खपत, सवारियों को उनके गंतव्य स्थान पर सुरक्षित पहुंचाने तथा साफ सफाई के मामले में कई बार पूरे एशिया में प्रथम का खिताब जीत चुकी है, लेकिन शर्म की बात है कि वही हरियाणा रोडवेज आज सरकार की वजह से निजीकरण के कगार पर खड़ी है। रोडवेज के कर्मचारियों ने हमेशा अपने परिवार की बगैर परवाह किए और जनहित को देखते हुए काम किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार कुछ पूंजीपतियों के सहारे इस विभाग को बेचना चाहती है, लेकिन संयुक्त कर्मचारी संघ सरकार को अपने मंसूबो में कामयाब नही होने देगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि जनसंख्या को देखते हुए बेड़े में दस हजार रोडवेज की बसों को लेकर आए ताकि आने वाली पीढ़ी को भी रोजगार मिल सके और रोडवेज की छवि भी बरकरार रह सके। सरकार ने बजट में कर्मचारियों को अनदेखा करके जो घोषणा की है वह कर्मचारियों के मुंह में ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।