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मांगों को लेकर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

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मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी। - फोटो : Jind
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ट्रेड यूनियन के आह्वान पर जिले के कर्मचारियों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद एसडीएम सत्यवान मान को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन मेें सीटू, इंटक, सर्व कर्मचारी संघ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ, कर्मचारी महासंघ ने हिस्सा लिया।
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प्रदर्शन से पहले सभी विभागों के कार्यालयों पर सुबह नौ से लेकर 11 बजे तक संयुक्त रूप से गेट मीटिंग की गई। 11 बजे से एक बजे तक हरियाणा कर्मचारी महासंघ की टीम ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को जनता के समक्ष उजागर किया। हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान व एचएसईबी वर्कर यूनियन के राज्य वरिष्ठ उपप्रधान कृष्ण नैन व राज्य सचिव जयवीर जुलानी व जिला सचिव बीरबल शर्मा ने कहा कि एक तरफ तो कर्मचारी वर्ग इस कोरोना जैसी महामारी में अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी से निभा रहा है तो दूसरी तरफ सरकार विभिन्न सरकारी विभागों का निजीकरण करने व कर्मचारियों की छंटनी करके उनके मुंह से निवाला छीन रही है। इसका ताजा उदाहरण बिजली निगम में जींद, जुलाना, उचाना व नरवाना के ग्रामीण फीडरों को तथा लगभग 20-20 गांवों को प्राइवेट कंपनीको दे दिया गया है। इसके दुष्परिणाम सीधे तौर पर जनता को प्रभावित करेंगे। 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री के साथ हरियाणा कर्मचारी महासंघ की हुई वार्ता में सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया था कि प्रत्येक कर्मचारी की नौकरी सुरक्षित रखी जाएगी। इसलिए हम सरकार से मांग करते हैं कि इस निजीकरण को तुरंत प्रभाव से रोका जाए व नौकरी से हटाए गए शारीरिक शिक्षकों को तुरंत समायोजित किया जाए।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान साधु राम ने कहा कि शिक्षा विभाग में दस वर्षों की सेवा के उपरांत 1983 शारीरिक शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया गया है। आज लगभग 20 दिन के बाद भी धरना प्रदर्शन करते हुए शारीरिक शिक्षक लगातार संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। रिटायर कर्मचारी संघ के जिला प्रधान आजाद पंचाल ने कहा कि सरकार महामारी का बहाना बनाकर केवल सहायता करने का दिखावा मात्र कर रही है। सर्व कर्मचारी संघ के खंड प्रधान संजीव ढांडा ने कहा कि आज देश का सबसे बड़ा विभाग रेलवे भी सरकार बेचने जा रही है। सरकार लगातार सार्वजनिक क्षेत्रों को निजी हाथों में अपने चहेतों को बेच रही है। महामारी के कारण देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के लगभग 50 करोड लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है, लेकिन सरकार राहत देने की बजाय लोगों का और अधिक शोषण कर रही है। इस अवसर पर वीरेंद्र गोयत, सुरेश खासा, जसवीर चहल, पवन राजना, कृष्ण चहल, सीताराम पांचाल, अनूप लाठर, अनिल पूनिया, वेद शर्मा, हीरामल, जितेंद्र, राजबीर, सुरेंद्र मान, अजीत नेहरा, राजकुमार रधाना, राजवीर ढिल्लों, कर्मवीर कपड़ों, प्रवीण सैनी, रामनिवास मौजूद रहे।
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सरकार ने सिर्फ पूंजीपतियों को दी राहत
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक मासा) ने प्रदर्शन करते हुए तहसीलदार मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपा। धरने की अध्यक्षता जन संघर्ष मंच के जिला प्रधान सुधीर शास्त्री ने की। जन संघर्ष मंच के प्रांतीय सदस्य पाल सिंह ने कहा कि कोरोना की आड़ में मजदूर वर्ग, खासकर प्रवासी और असंगठित मजदूरों को बेरोजगारी, भुखमरी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। खेद की बात है कि मजदूर-मेहनतकश को राहत देने की बजाय सरकार ने पूंजीपतियों को ही राहत प्रदान की है। सरकार के 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में जितनी भी राहत है, वह पूंजीपतियों के लिए ही दी है।
मांगों को लेकर मजदूर व कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
जुलाना की पुरानी अनाज मंडी में मजदूरों और कर्मचारियों ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया। रोष प्रदर्शन में सीटू, आशा वर्कर, सर्व कर्मचारी संघ, ग्रामीण सफाई कर्मी, रिटायर्ड कर्मचारी संघ आदि संगठनों ने भाग लिया। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान रामफल दलाल ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर रही।

मांगों को लेकर प्रदर्शन करते जन संघर्ष मंच हरियाणा के सदस्य।- फोटो : Jind

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