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बद्दोवाल टोल प्लाजा से नहीं उठाया बुजुर्ग का शव

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धरने को संबोधित करते किसान नेता। संवाद। - फोटो : Jind
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नरवाना। गांव बडनपुर में बुजुर्ग द्वारा जहर निगलकर आत्महत्या के मामले में चौथे दिन बुधवार को भी परिजनों और किसानों ने शव को बद्दोवाल टोल प्लाजा से नहीं उठाया। किसानों से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नरेंद्र बिजरानिया तथा एसडीएम डॉ. राजेश खोथ ने दो घंटे तक बातचीत की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। प्रशासन ने बीडीपीओ की भूमिका की जांच करने, नौकरी देने तथा पट्टे की राशि देने की बात मान ली थी। आत्महत्या के मामले में मुआवजा देने की बात प्रशासन ने नहीं मानी। एसडीएम ने परिजनों व अन्य लोगों को शव का अंतिम संस्कार करने की अपील भी की लेकिन परिजन नहीं माने।
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गांव बडनपुर में पंचायती जमीन का कब्जा छुड़वाने के लिए चार दिन पहले प्रशासनिक अमला बीडीपीओ के नेतृत्व में गया था। यहां पर दो बुजुर्गों ने जहरीला पदार्थ निगल लिया था। रात को बजुर्ग इंद्र सिंह की मौत हो गई। परिजनों ने इंद्र सिंह का शव बद्दोवाल टोल प्लाजा पर रखकर धरना शुरू कर दिया। धरने में प्रतिदिन आसपास के लोग पहुंचने लगे। बुधवार को भाकियू के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, कंडेला खाप के प्रधान ओमप्रकाश कंडेला, भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष फूल सिंह श्योकंद भी धरना स्थल पर पहुंचे गए। दिन पर किसानों ने भाषणों के माध्यम से प्रशासन को कोसा।
दोपहर बाद एसएसपी नरेंद्र बिजरानिया तथा एसडीएस डॉ. खोथ के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने नरवाना के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में किसानों से बातचीत की। प्रशासन ने मृतक के एक परिजन को नौकरी देने, बीडीपीओ को यहां से हटाने तथा मामले की जांच करने, पट्टे पर ली गई जमीन की राशि वापस देने की मांग मान ली थी। इसके अलावा जमीन के मामले में अदालत में चल रहे केस का फैसला आने की बात कही। प्रशासन ने मुआवजा यह कहकर देने से मना कर दिया कि आत्महत्या मामले में मुआवजा नहीं दिया जा सकता, जबकि किसान 60 लाख रुपये मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। इसी कारण बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई।
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आरोप-प्रशासन की गलती से की आत्महत्या
भाकियू के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, कंडेला खाप के प्रधान ओमप्रकाश कंडेला तथा अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि प्रशासन किसानों को गुमराह कर रहा। एक तरफ से किसानों की ही जमीन छीनी जा रही हैं और दूसरी तरफ किसानों को अन्य तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है। इंद्र सिंह ने प्रशासन की प्रताडना से तंग आकर जहर निगला था। इसके लिए सीधा-सीधा प्रशासन जिम्मेदार है, इसलिए 60 लाख रुपये मुआवजा मिलना चाहिए।
आज हो सकता है खटकड़ टोल भी फ्री
किसानों ने कहा कि अब तक वह केवल बद्दोवाल टोल प्लाजा पर ही धरना देकर बैठे थे। प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानी। अब वह बद्दोवाल के बाद खटकड़ टोल प्लाजा पर भी धरना शुरू करेंगे और दोनों टोल को फ्री करवाएंगे। जब तक प्रशासन उनकी मांगें नहीं मान लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन ने मांग मान ली थी। इसलिए लोगों को भी अपनी जिद छोड़कर शव का अंतिम संस्कार करना चाहिए। प्रशासन अपने स्तर पर जितना कुछ कर सकता था, वह सब किया जा रहा था। दो घंटे बातचीत की लेकिन बैठक बेनतीजा रही। लोगों को भी अपनी जिद्द छोड़ देनी चाहिए।
-नरेंद्र बिजरानिया, एसएसपी
प्रशासन ने एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, पट्टे पर ली गई जमीन की राशि लौटाने, बीडीपीओ को जींद ऑफिस में लगाकर जांच करवाने की मांग मान ली थी। परिजन मुआवजे की मांग कर रहे हैं लेकिन आत्महत्या के मामले में मुआवजा नहीं दिया जा सकता। लोगों को संयम के साथ काम लेना चाहिए और शव का अंतिम संस्कार करना चाहिए।
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-डॉ. राजेश खोथ, एसडीएम

एसएसपी नरेंद्र बिजरानिया, एसडीएम डॉ. राजेश खोथ के साथ बैठक में भाग लेते किसान नेता। संवाद।- फोटो : Jind

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