एक पाद बकासन
योग विशेषज्ञ एवं अंतरराष्ट्रीय योग खिलाड़ी डॉ. जनक राज ने बताया कि एक पाद बकासन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है। एक अर्थात एक, पाद अर्थात पैर और बक अर्थात बगुला। इस आसन में शरीर की मुद्रा एक पैर के सहारे संतुलित बगुले जैसी दिखाई देती है इसलिए इसे एक पाद बकासन कहा जाता है। यह आसन शारीरिक शक्ति, संतुलन और मानसिक एकाग्रता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
विधि
सबसे पहले बकासन की स्थिति में आएं। दोनों हथेलियों को कंधों की चौड़ाई पर जमीन पर टिकाएं। शरीर का भार हाथों पर लेते हुए एक पैर को पीछे की ओर सीधा उठाएं जबकि दूसरा पैर भुजा पर संतुलित रखें। गर्दन और रीढ़ सीधी रखें तथा सामान्य गति से श्वास लेते रहें। अपनी क्षमता अनुसार कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रुकें और फिर धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं। इसके बाद दूसरी ओर से भी अभ्यास करें।
लाभ
हाथों, कंधों, कलाई और भुजाओं को मजबूत बनाता है।
पेट की मांसपेशियों को सक्रिय कर कोर स्ट्रेंथ बढ़ाता है।
शरीर का संतुलन, समन्वय और एकाग्रता विकसित करता है।
रीढ़ की स्थिरता एवं लचीलापन बढ़ाने में सहायक है।
आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक नियंत्रण में वृद्धि करता है।
सावधानियां
इस आसन का अभ्यास केवल प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में करें।
कलाई, कंधे, कोहनी या पीठ में चोट होने पर इसका अभ्यास न करें।
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, चक्कर आने या हाल ही में सर्जरी होने पर चिकित्सकीय सलाह के बिना अभ्यास न करें।
शरीर पर अनावश्यक जोर न डालें और अपनी क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें।
अभ्यास से पहले पर्याप्त वार्म-अप अवश्य करें तथा समतल और सुरक्षित स्थान पर योग मैट का उपयोग करें।