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पीपीपी के आधार पर पेंशन बनाने के सरकार के निर्णय से जिले में घटी नई पेंशन बनने की संख्या

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समाज कल्याण विभाग में पूछताछ करने आए लोग। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के आधार पर पेंशन बनाने के सरकार के निर्णय ने जिले में हर माह बनने वाली पेंशन की संख्या को छह गुणा तक कम किया है। जिसके चलते अब तक आठ माह में समाज कल्याण विभाग को मिली सूची में 700 बुजुर्गों की पेंशन बनी है, जबकि सरकार के इस निर्णय से पहले जिले में प्रति माह लगभग 1200 पेंशन समाज कल्याण विभाग द्वारा बनाई जाती थी।
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सरकार के इस निर्णय के बाद से आए दिन बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटते दिखाई देते हैं। इन बुजुर्गों के हाथों में 60 साल से अधिक होने का सरकार द्वारा लागू किया गया प्रमाण परिवार पहचान पत्र होता है। जिसमें इनकी आयु निर्धारित से भी अधिक होती है। इसके बावजूद भी विभाग से इनको मुख्यालय से आने वाली सूची का ही हवाला दिया जाता है। जिसके चलते बुजुर्गों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। समाज कल्याण विभाग के मुख्यालय से आठ माह में लगभग 935 बुजुर्गों की पेंशन की सूची अब तक जारी हुई है। इसमें से 580 योग्य बुजुर्गो की विभाग ने पेंशन शुरू भी की है, लेकिन इस आंकड़ेे के कारण बुजुर्गों की काफी कम संख्या में सूची जारी की जा रही है। इसके कारण सरकार को हर महीने लाखों रुपये की बचत हो रही है और सम्मान पेंशन पाने के हकदार बुजुर्गों को हक से भी वंचित रहना पड़ रहा है।
मार्च माह में मुख्यमंत्री ने खुद परिवार पहचान पत्र के माध्यम से पेंशन बनाने की शुरूआत की थी। इसमें प्रथम चरण में जिले में 265 बुजुर्गों की सूची विभाग को मिली थी। इसमें से 173 बुजुर्गों की पेंशन बनी। इसके बाद दूसरे चरण में 35 नाम की सूची आई तो इसमें से 19 की पेंशन बनी। तीसरे चरण में 333 की सूची आई जिसमें से 259 की पेंशन बनी। इसके बाद सितंबर माह में केवल 151 बुजुर्गों की सूची मिली। इनमें से 109 बुजुर्गों की पेंशन समाज कल्याण विभाग ने दस्तावेजों की जांच कर बनाई। इसके अलावा इन सूची में जिनके नाम आए और पेंशन नहीं बनी। उनके परिवार की या तो पीपीपी में आमदनी ज्यादा दर्शाई गई थी या फिर यह किसी विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे।
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प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के कारण उन बुजुर्गों को अधिक परेशानी हो रही है। जिनकी आयु पीपीपी में 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है, लेकिन योजना के शुरू होने के छह माह बीतने के बाद भी उनका समाज कल्याण विभाग के मुख्यालय से आने वाली सूची में नाम नहीं आया। जिसके कारण बुजुर्गों को आए दिन जिला मुख्यालय पर आकर अपने नाम आने की जांच करवानी पड़ रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी भी निर्धारित समय की जानकारी बुजुर्गों को उपलब्ध नहीं करवा सकते।
--मामन राम, जोगी खेड़ा।
उनकी परिवार पहचान पत्र में 62 साल की आयु दर्ज है। जिसके चलते वह पेंशन बनवाने के लिए कई बार समाज कल्याण विभाग कार्यालय के चक्कर काट चुकी है, लेकिन उसकी पेंशन नहीं बनाई जा रही। हर बार विभाग के अधिकारी उनको मुख्यालय से आने वाली सूची में नाम नहीं होने का हवाला देकर वापस भेज देते हैं।
-शंकुतला देवी, गांगोली निवासी
जिला समाज कल्याण विभाग को जो सूची मुख्यालय से पीपीपी के आधार पर बुजुर्गों की पेंशन के लिए मिलती है। उनको फोन पर जानकारी देकर दस्तावेज जमा करवाए जाते हैं। जिसके बाद तुरंत उनकी पेंशन शुरू कर दी जाती है, ताकि बुजुर्ग पेंशन का लाभ ले सकें। पिछले सात माह में समाज कल्याण विभाग द्वारा पीपीपी के तहत 565 पेंशन शुरू की गई हैं। इस बार 252 बुजुर्गों की सूची सरकार ने जारी की है। जिनकी पेंशन बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
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-सरोज देवी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जींद।
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