जींद। अनाज मंडी में रविवार को हैफेड के एफसीआई के कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ हुए विवाद के चलते मंडी में आढ़तियों ने गेहूं की खरीद व उठान के कार्य का विरोध कर बंद कर दिया है। इसके चलते रविवार को दोपहर बाद गेहूं खरीद का कार्य पूर्ण रूप से बंद रहा। इसमें आढ़तियों ने आरोप लगाया कि किसानों से एमएसपी पर खरीदे गए गेहूं को गोदामों से वापस भेजा जा रहा है। कारण पूछने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उनकी गोदामों में प्रवेश प्रतिबंधित की गई। इसके विरोध में आढ़तियों ने गेहूं की खरीद व उठान पर बेमियादी पाबंदी लगा दी। मंडी की आढ़ती एसोसिएशनों ने बैठक कर फैसला लिया कि जब तक उनके माध्यम से खरीदा गया किसानों का गेहूं गोदामों में नहीं उतरवाया जाता और उनकी प्रवेश नहीं खोला जाता वह नई अनाज मंडी से किसी भी सरकारी खरीद एजेंसी को किसानों के गेहूं का कोई दाना नहीं बेचेंगे और न ही उनकी गाड़ियों में गेहूं का लदान करवाएंगे।
नई अनाज मंडी में 3 सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा आढ़तियों के माध्यम से एमएसपी पर किसानों की गेहूं की फसल खरीदी जा रही है। यह तीनों खरीद एजेंसियां मंडी से नियमानुसार पूरा निरीक्षण कर खरीदे गए गेहूं को सीधे एफसीआई के गोदामों में भेज रही हैं। गेहूं सरकारी मापदंडों के अनुसार सही न उतरने पर आढ़तियों की दुकानों पर वापस भेज देते हैं। आढ़तियों ने बताया कि उनकी दुकानों पर जब यह गेहूं के कट्टे वापस आते हैं तो इससे उन्हें 13 रुपये प्रति कट्टा वहन करने पड़ते हैं, जबकि एक गाड़ी में लगभग 450 से ज्यादा गेहूं के कट्टे लोड होते हैं। अनेक गाड़ियां उनकी दुकानों से लोड होती हैं।
आढ़तियों ने कट्टे की हेराफेरी का लगाया आरोप
एफसीआई के कर्मियों पर आढ़तियों ने सात कट्टे गेहूं के कम करने का आरोप लगाया है। इसमें प्रधान सत्यनारायण ने बताया कि उनके द्वारा गोदाम में 600 कट्टे भेजे गए थे, लेकिन उनको रसीद 593 कट्टों की दी गई। इस पर एफसीआई के क्वांटिटी मैनेजर राजीव चौधरी ने बताया कि प्रत्येक कट्टे का वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन 600 कट्टों का वजन कम होने के कारण कटौती हुई है। इनमें गेहूं कम भरे गए। इसके कारण सभी कट्टों का वजन करने के बाद 593 कट्टों की रसीद दी गई है। इनमें 350 किलोग्राम गेहूं कम होने के कारण सात कट्टों की कटौती की गई।
कोट
आढ़तियों ने एफसीआई के अधिकारियों व कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि जहां एफ सीआई के गोदामों में उनके माध्यम से खरीद किया गया गेहूं उतरता है। वहां आढ़तियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। वहां पर पहुंची गाड़ियों के वजन की कोई जानकारी दी जाती है और उस गेहूं में कमी निकालकर गेहूं की गाड़ियों को वापस उनकी दुकानों पर भेज दिया जाता है। इससे उन्हें नुकसान वहन करने को विवश होना पड़ रहा है। आढ़तियों ने बैठक में फैसला लिया कि जब तक एफ सीआई अधिकारी व कर्मचारी किसानों से खरीदे गए गेहूं को अपने गोदामों में नहीं उतरवाते और उनकी गोदामों में एंट्री बैन का फैसला वापस नहीं लेते वह सरकारी खरीद एजेंसियों को न ही किसानों का गेहूं बेचेंगे, न पहले से बेचे गए गेहूं का खरीद एजेंसियों की गाड़ियों में अपने मजदूरों से लदान करवाएंगे और न ही एफ सीआई द्वारा वापस भेजे गए गेहूं के कट्टों को अपनी दुकानों पर उतरवाएंगे।
-सत्यनारायण जैन, प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन