जींद। जिला नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले दस साल से बंद है। इसका कारण है कि नागरिक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। रोजाना अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोगों को परेशानी होती है
इन लोगों को बाहर निजी रेडियोलॉजिस्ट से महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ रहा है। इस पद को भरने के लिए जींद प्रशासन से लेकर सरकार तक कोई गंभीर नहीं है। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी बेहतर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 14 लाख की आबादी के जिले में किसी भी सरकारी अस्पताल में 10 साल से मरीजों के अल्ट्रासाउंड करने की सुविधा नहीं है। वर्ष 2016 में यहां से रेडियोलॉजी विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है।
इससे पहले रेडियोलाजी डॉ. मंजूला डिप्टी सिविल सर्जन के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन प्रशासनिक कार्य होने के चलते वह अल्ट्रासाउंड करने के लिए समय नहीं दे पाती थीं। जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में कहीं भी अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है। रेडियोलॉजिस्टों के अभाव में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों का यही हाल है।
इन अस्पतालों में लाखों रुपये की कीमत की मशीनें धूल फांक रही हैं। विभाग ने इन सभी मशीनों को सील करके कमरों में बंद किया हुआ है। जिलभर में 500 मरीजों को रोजाना अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है। इससे अल्ट्रासाउंड करवाने पर जिले के मरीजों का करीब चार लाख रुपये खर्च हो रहा है।
सामान्य ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर जाना पड़ता है और 600 से 800 रुपये तक भुगतान करना पड़ता है। अस्पताल में दाखिल मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बाहर भेजना पड़ता है। इससे अतिरिक्त खर्च के साथ ही मानसिक और शारीरिक परेशानी भी मरीज को झेलनी पड़ती है। गर्भवतियों के जरूरत के अनुसार दो से तीन अल्ट्रासाउंड फ्री करवाए जा रहे हैं।
बाक्स
सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को
नागरिक अस्पताल के प्रसूति वार्ड में रोजाना औसतन 200 से ज्यादा महिलाओं की ओपीडी होती है। इनमें से करीब 50 गर्भवतियों को किसी न किसी तरह की परेशानी होने पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए निजी अस्पतालों को पैनल पर लिया हुआ है। यहां महिलाओं को परेशानी का सामना करके जाना पड़ता है।
वर्जन
रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। रोज गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड पैनल पर मौजूद केंद्रों पर करवाया जाता है। खाली पदों के बारे में मुख्यालय को अवगत करवाया हुआ है। अब दोबारा फिर से रिमाइंडर भेजा जाएगा, ताकि जिला मुख्यालय पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा को शुरू करवाया जा सके।
-डॉ. सुमन कोहली, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल जींद।