जींद। आमतौर पर लोग घर को सजाने के लिए गमले में फूलों के पौधे लगाते हैं लेकिन शहर की जानी-मानी प्राकृतिक चिकित्सक रोहतक रोड निवासी डॉ. परमिंद्र कौर ने घर को औषधालय का रूप दे दिया है। पढ़ाई के दिनों से ही पौधों के प्रति गहरा शौक रखने वाली डॉ. परमिंद्र कौर आज घर में 300 से अधिक किस्म के 500 से ज्यादा औषधीय और सजावटी पौधों को स्वयं संभाल रही हैं। 30 वर्षों से देखभाल कर रही हैं।
डॉ. परमिंद्र कौर बताती हैं कि जब वे पढ़ाई कर रही थीं तभी उन्हें यह अहसास हो गया था कि प्रकृति ही सबसे बड़ी चिकित्सक है। इसी सोच के साथ उन्होंने धीरे-धीरे औषधीय पौधों को घर में लगाना शुरू किया, जो आज एक बड़े हर्बल गार्डन का रूप ले चुका है।
उनके बगीचे में तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, अश्वगंधा, कालमेघ, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, स्टीविया, अर्जुन, नीम, पीपल, बेलपत्र, आंवला, करी पत्ता, लेमनग्रास, पुदीना, सदाबहार, पत्थरचट्टा, अंजीर, सहजन, हरसिंगार, अनार, जामुन, एलोवेरा की कई किस्में, हल्दी, अदरक, अशोक, अपराजिता और गुड़हल जैसे अनेक पौधे शामिल हैं।
प्राकृतिक चिकित्सक होने के नाते डॉ. परमिंद्र कौर इन पौधों का प्रयोग उपचार में भी करती हैं। वह बताती हैं कि गिलोय और तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं, एलोवेरा पेट, त्वचा और बालों के लिए बेहद लाभकारी है, अर्जुन हृदय रोगों में उपयोगी है, जबकि अश्वगंधा और ब्राह्मी मानसिक तनाव व अनिद्रा में कारगर हैं। इसी तरह बेलपत्र पाचन, नीम रक्त शुद्धि, स्टीविया मधुमेह, सहजन पोषण और पत्थरचट्टा किडनी संबंधी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है।
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खुद पौधों की देखभाल करती हैं डॉ. परमिंद्र
डॉ. परमिंद्र कौर न केवल खुद पौधों की देखभाल करती हैं बल्कि अपने मरीजों को भी बीमारियों के अनुसार इनका सही उपयोग करने की जानकारी देती हैं। वे मानती हैं कि यदि हर व्यक्ति अपने घर में 5-10 औषधीय पौधे भी लगा ले, तो कई बीमारियों से बचाव संभव है।
आज उनका यह घर में सजा हर्बल गार्डन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। आसपास के लोग भी उनके बगीचे को देखने आते हैं और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी लेकर प्रकृति से जुड़ने का संकल्प लेते हैं।