शहर के रोहतक रोड पर स्थित नशा मुक्ति केंद्र में एक सप्ताह पहले हुए डबल मर्डर के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है। विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।
विभाग द्वारा जिले में चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण किया जाएगा और नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले नशा मुक्ति केंद्रों को सील किया जाएगा। इस समय जिले में चार नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं।
इनमें एक नशा मुक्ति केंद्र रेडक्रॉस द्वारा जींद में चलाया जा रहा है तथा तीन नशा मुक्ति केंद्र निजी हैं। इनमें दो निजी नशा मुक्ति केंद्र जींद में तथा एक जुलाना में संचालित है।
2012 में सफीदों के नशा मुक्ति केंद्र में भी हुई थी हत्या
नशा मुक्ति केंद्र में हत्या का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2012 में सफीदों में चल रहे एक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में संदिग्ध परिस्थितियों में उपचाराधीन व्यक्ति की मौत का मामला भी सामने आया था। मृतक पानीपत के नारा गांव का निवासी था और उसे करीब 10 दिन पहले ही नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया था। इस मामले में पुलिस द्वारा मृतक के भाई की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
नशा छुड़ाने के नाम पर दी जाती हैं यातनाएं
जिले में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों में नशा छुड़वाने के नाम पर मरीजों को अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। यहां दाखिल मरीजों को केयर टेकरों द्वारा बुरी तरह से प्रताड़ित किया जाता है। वहीं, नशा छुड़ाने के नाम पर इनके परिजनों से मोटी रकम भी वसूली जाती है।
नशामुक्ति केंद्र चलाने के ये हैं नियम
हरियाणा सरकार द्वारा एक सितंबर 2010 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर हरियाणा नशा मुक्ति केंद्र नियम-2010 बनाया गया था, जिसमें जिला स्तर पर डीसी, सिविल सर्जन और जिला समाज कल्याण अधिकारी की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कमेटी समय-समय पर निजी नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण, मूल्यांकन और लाइसेंस की शर्तों की अनुपालना पर नजर रखेगी।
केंद्रों में एमडी चिकित्सक अथवा मान्यता प्राप्त संस्थान से तीन माह की ट्रेनिंग प्राप्त चिकित्सक, मनोचिकित्सक, समाज विज्ञान में एमए, एमफिल पास दो परामर्शदाता, 24 घंटे चार क्वालिफाइड स्टाफ नर्स, दस जमा दो तक पढ़े तीन वार्ड अटेंडेंट, तीन चौकीदार, दो सफाई कर्मी और एक खाना पकाने वाला होना चाहिए।
जिले में चल रहे सभी नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण किया जाएगा। नशा मुक्ति केंद्र के रिकार्ड व अन्य सुविधाओं की जांच की जाएगी। निरीक्षण के दौरान यह भी जांचा जाएगा कि वहां दाखिल मरीजों को सही तरीके से उपचार दिया जा रहा है या नहीं। यदि किसी नशा मुक्ति केंद्र में किसी तरह की खामी मिलती है तो उनको सील किया जाएगा।
डॉ. पालेराम, डिप्टी सिविल सर्जन, सामान्य अस्पताल, जींद।