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नागरिक अस्पताल में फिर मनवता शर्मशार, 11 माह के बच्चे के पोस्टमार्टम पर अड़े चिकित्सक

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शवगृह से बच्चे के शव को लेकर जाते परिजन। - फोटो : Jind
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जींद। जींद में अव्यवस्थाओं का नाम ही शायद नागरिक अस्पताल हो गया है। बार-बार मुंह की खाने के बाद भी यहां की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। एक सप्ताह पहले गलत तरीके से महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए रोहतक पीजीआई रेफर करने के बाद अब 11 महीने के बच्चे के पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सक की जिद्द परिजनों पर भारी पड़ी। इसका परिणाम यह हुआ कि सोमवार शाम चार बजे दम तोड़ने वाले 11 माह के बच्चे का अंतिम संस्कार 17 घंटे बाद हो सका। इसके चलते पूरे परिवार व रिश्तेदार रात भर न तो सो सके और न ही कुछ ओर काम कर सके। वहीं पूरे मामले में विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा अस्पताल पहुंचे और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर जमकर गुस्सा निकाला। इसके बाद बच्चे का शव परिजनों को दिया गया।
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क्या है पूरा मामला
दरअसल रोहतक रोड स्थित लक्ष्मीनगर निवासी रोहित का 11 माह का बेटा रुद्र दो-तीन दिन से बीमार चल रहा था उसे बुखार की शिकायत थी। इसके चलते रोहित ने रुद्र को इलाज के लिए जींद के कई निजी अस्पतालों में दिखाया, यहां से उन्हें हिसार या रोहतक ले जाने की सलाह दी गई। इस पर परिजन बच्चे को रोहतक में निजी अस्पताल में ले गए। यहां बस स्टैंड के पास एक अस्पताल में उसे दाखिल करवा दिया गया। बच्चे के पिता रोहित के अनुसार शाम करीब चार बजे उसे बच्चे की रिपोर्ट मिली और चिकित्सकों ने रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य बताया। इसके बाद करीब सवा चार बजे बच्चे के मुंह में झाग आए और उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद अस्पताल ने भी बच्चे को मृत घोषित कर दिया और शव उन्हें सौंप दिया।
रोहित के अनुसार वे करीब छह बजे जींद आए और बच्चे के अंतिम संस्कार की तैयारी की। जब वे लोग बच्चे को दफनाने जा रहे थे, तभी परिवार में किसी को लगा कि बच्चे की धड़कन चल रही है। इस पर एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां से सलाह दी गई कि बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाए। इस पर बच्चे को दूसरी अस्पताल में लाया गया तो चिकित्सक ने उन्हें सरकारी अस्पताल में भेज दिया। रोहित के अनुसार शाम करीब सात बजे वे लोग जींद के नागरिक अस्पताल में बच्चे को लेकर पहुंचे। यहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने जांच करने के बाद बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। इस पर चिकित्सक ने पुलिस कार्रवाई के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी।
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मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाने के बावजूद नहीं माने चिकित्सक
बच्चे के पिता रोहित के अनुसार जांच के बाद उन्होंने चिकित्सक को रोहतक के निजी अस्पताल से प्राप्त वह दस्तावेज भी दिखाए, जिसमें बच्चे का मृत दिखाया गया है, लेकिन चिकित्सक बच्चे के पोस्टमार्टम पर अड़े रहे। रोहित के अनुसार चिकित्सक की मनमानी के चलते रात भर बच्चे का शव अस्पताल के शवगृह में रहा।
नहीं थी पोस्टमार्टम की जरूरत : विधायक
वहीं सुबह विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचे और यहां चिकित्सा अधीक्षक के कमरे के बाहर बैठकर रोष जताया। कुछ ही देर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गोपाल गोयल यहां पहुंचे और उन्होंने विधायक बातचीत कर शव परिजनों को लौटा दिया। इस दौरान अस्पताल के कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने कहा कि इस मामले में पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं थी और चिकित्सक की हठधर्मिता के कारण पूरा विवाद हुआ।
कभी पोस्टमार्टम नहीं करने तो कभी करने पर अड़ते हैं चिकित्सक
जींद नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों की कार्यप्रणाली के चलते यह अस्पताल हमेशा ही चर्चा में रहता है। दरअसल कुछ दिन पहले निडाना गांव निवासी एक महिला की मौत में चिकित्सकों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। वहीं इस मामले में रोहतक पीजीआई ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर कहा कि शव को गलत तरीके से रोहतक भेजा साथ ही महिला के शव का पोस्टमार्टम भी जींद में ही अगले दिन हुआ।
सिविल सर्जन कोई कार्रवाई नहीं कर रही
मैंने सिविल सर्जन से बात कर परिजनों को शव देने के लिए कहा था। कोई दुर्घटना या अन्य मामले में पोस्टमार्टम की जरूरत होती है, लेकिन इसमें ऐसा कोई मामला नहीं था। इसके बावजूद सिविल सर्जन ने कोई कदम नहीं उठाया। इससे पहले निडाना गांव की महिला के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। सिविल सर्जन कोई भी उचित कार्रवाई नहीं कर रही हैं। इसके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक से बात की जाएगी। अस्पताल लोगों को परेशान करने के लिए नहीं सुविधा देने के लिए है। चिकित्सा अधीक्षक ने औपचारिकता के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मैंने रात को ही सिविल सर्जन से इस बारे में बात की थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
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डॉ. कृष्ण मिड्ढा, विधायक जींद।
चिकित्सक की गलती नहीं
चिकित्सक की इस मामले में गलती नहीं है। इस प्रकार के मामले में चिकित्सक पोस्टमार्टम करवा सकते हैं। औपचारिकता के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
डॉ. शशि प्रभा अग्रवाल, सिविल सर्जन, जींद।
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