जींद। जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में वर्ल्ड हियरिंग-डे पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सिविल सर्जन डाॅ. गोपाल गोयल ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। जबकि उप चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. राजेश भोला, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. अरविंद, उप सिविल सर्जन डाॅ. रमेश पांचाल विशिष्ट अतिथि रहे।
खुशी कॉलेज ऑफ नर्सिंग कागसर की छात्राओं ने नर्सिंग ट्यूटर स्वीटी, अन्नू, शीतल के निर्देशन में हियरिंग एड शीर्षक नाटक का मंचन किया। इसके अलावा चौधरी बीरेंद्र सिंह नर्सिंग कॉलेज उचाना की छात्राओं ने भी नर्सिंग ट्यूटर अंजू के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। सीएमओ डाॅ. गोपाल गोयल ने कहा कि कान हमारे शरीर का सबसे जरूरी अंग है। इसके बिना जीवन की कल्पना करता मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद लोग अपने कानों का ख्याल नहीं रखते हैं।
ऐसे में इसे लेकर जागरूकता फैलाने के मकसद से हर साल वर्ल्ड हियरिंग-डे मनाया जाता है। यह दिन हियरिंग लॉस और बहरेपन को रोकने के के देखभाल के लिए जागरूक किया जाता है। डिप्टी एमएस डाॅ. राजेश भोला ने कहा कि आज के बदलते परिवेश और तकनीकीकरण में कई चीजें व्यक्ति के कानों को प्रभावित करती है। युवाओं के फैशन के बदलते दौर में इयरफोन का उपयोग चरम पर है। देर तक इयरफोन के इस्तेमाल से भी दिक्कतें बढ़ती हैं। बहरेपन की समस्या हो जाती है।
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाॅ. अरविंद, डाॅ. बृजेंद्र घणघस ने बताया कि कम सुनाई देने के मुख्य कारण शोरगुल वाले इलाके में रहना, कान के भीतरी हिस्से में क्षति, मील में काम करना, कान के आंतरिक प्रेशर में परिवर्तन, कान में संक्रमण, कानों में तेज आवाज से गाना सुनना प्रमुख है। उन्होंने बताया कि अगर किसी की साफ सुनाई न देना, पीछे से आने वाली आवाज या भीड़ में किसी एक की आवाज को सुन पाने में समस्या, टीवी, रेडियो या अन्य यंत्रों को तेज आवाज में सुनना, सामने वाले के शब्द नहीं समझने पर बात को बीच में छोड़ देना बहरेपन के मुख्य लक्षण हैं।
बहरेपन से बचने के लिए कानों की नियमित सफाई करें। जगह-जगह कान साफ करने वालों से कभी भी कानों की सफाई न करवाएं। अगर सुनने में कोई समस्या आ रही है तो चिकित्सक से सलाह लें। इस अवसर पर डाॅ. बिजेंद्र ढांडा, डाॅ. संकल्प, ऑडियोलॉजिस्ट अपूर्वा शर्मा, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर सुनीता, इंद्रो, मेडिकल सोशल वर्कर सुनील सैनी, वार्ड सहायक अमित, मनजीत, विनोद, भूपेंद्र मौजूद थे।