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आंकड़ों की जादूगरी में उलझी धान खरीद

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अनाज मंडी में धान की फसल को सुखाते किसान। - फोटो : bureau
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जिले की अनाज मंडियों में धान की खरीद अब आंकड़ों की जादूगरी में उलझती जा रहा है। एक एक ओर प्रशासन ने मौजूदा वर्ष के आंकडे़ जारी कहा है कि इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा धान की खरीद हो चुकी है। तो वहीं किसानों को कहना है कि प्रशासन आंकड़ों की बाजीगरी ना करे हमारी धान को खरीदने का काम करे। मंडी ने धान बेचने आए किसानों में खरीद न होने को लेकर गुस्सा बना हुआ है। किसानों को कहना है कि धान में निर्धारित नमी की सीमा को ज्यादा बताकर प्रशासन किसानों का धान नहीं खरीद रहा है। जबकि धान में अब नहीं निर्धारित सीमा से भी कम बची है। दरअसल जिला प्रशासन द्वारा अभी तक जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में 6,54,760 क्विंटल धान की खरीद का दावा किया जा रहा है। जबकि पिछले वर्ष इस समय तक 3,38,130 क्विंटल धान की खरीद के आंकड़े प्रशासन की तरफ से प्रस्तुत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा आंकड़ों में तो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी धान की खरीद दिखाई जा रही है, जबकि अनाज मंडियों में अभी तक खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से शुरू नहीं हो पाई है। इससे गुस्साए किसानों को कहना है कि  पिछले साले की अपेक्षा ज्यादा धान खरीद होने से क्या अब प्रशासन किसानों की धान नहीं खरीदेगा। किसानों द्वारा लगातार मिल रही शिकायत पर अमर उजाला की टीम ने जींद अनाज मंत्री पहुंचकर किसानों की हालत और धान की बिक्री का जायजा लिया। इसमें पाया कि धान की खरीद न होने से किसानों में जिला प्रशासन व खरीद एजेंसियों के प्रति रोष पनप रहा है। इसके चलते आए दिन अनाज मंडियों में धरना, प्रदर्शन व तालाबंदी जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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नवंबर माह तक खरीदी जाएगी धान
सरकार सिर्फ पीआर धान की ही खरीद करती है। इस बार नवंबर तक पीआर धान खरीदी जानी है। ऐसे में किसानों के पास करीब डेढ़ महीने का समय फसल बेचने के लिए है। वहीं मंडी में धान बेचने में सबसे ज्यादा दिक्कत फसल की नमी के कारण बन रही है। अधिक नमी वाली फसल को मिलर नहीं खरीद रहे हैं। इससे फसल सूखने पर उन्हें नुकसान होता है। हालांकि सरकार ने 22 प्रतिशत तक नमी वाली फसल खरीदने के आदेश दिए है, लेकिन कंबाइन से कटने वाली फसल में नमी की मात्रा इससे भी अधिक आ रही है।

कहां कितनी हुई धान की खरीद
जिला प्रशासन की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार जिले की 13 अनाज मंडियों व अन्य
 खरीद केंद्रों में धान की खरीद की जा रही हैं। 15 अक्तूबर को साम तक जिले की विभिन्न मंडियों में 6,54, 760 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। जबकि पिछले साल इस अवधि तक 3,38,130 क्विंटल धान की खरीद की गई थी। इस बार अलेवा, बरटा, धमतान, धनौरी, गढ़ी, जींद, जुलाना,  खरल, नगूरां, नरवाना, पिल्लूखेड़ा, सफीदों तथा उचाना अनाज मंडी में धान की खरीद की जा रही है। कुल आवक में से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड, हरियाणा वेयर हाउस, भारतीय खाद्य निगम, एग्रो तथा मिलर द्वारा खरीद की गई है। कुल आवक में से मिलर द्वारा 34790 क्विंटल, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 90820 क्विंटल, हैफेड द्वारा 303700 क्विंटल, भारतीय खाद्य निगम द्वारा 93150 क्विंटल, हरियाणा वेयर हाउस द्वारा 42070 क्विंटल, एग्रो द्वारा 90230 क्विंटल धान की खरीद की गई है।
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अब तक 16760 क्विंटल बाजरा खरीदा
जिले की जींद जुलाना, नरवाना तथा उचाना मंडी में बाजरे की खरीद की जा रही है। अब तक 16760 क्विंटल बाजरे की खरीद की जा चुकी है। जींद में 7060 क्विंटल, जुलाना में 3310 क्विंटल, नरवाना में 390 क्विंटल तथा उचाना में 6000 क्विंटल बाजरे की खरीद की गई है। जींद अनाज मंडी में बाजरा 1224 से 1252 रुपये और जुलाना मंडी में 1190 से 1220 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरे की खरीद की गई है।

दस दिन से नहीं मिल रहा खरीददार
मंडी में करीब दस दिन से फसल पड़ी है, लेकिन फसल की खरीदारी नहीं हो रही है। जिसके कारण खेत का काम भी बाधित हो रहा है। वहीं खुद ही फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। सरकार की हिदायतों के अनुसार हम फसल बेचना चाहते हैं, लेकिन खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है।
- हरिकेश, किसान

खरीद एजेंसियां कर रही हैं मनमानी
मंडी में हजारों क्विंटल धान पड़ी है, लेकिन खरीददार मनमानी करते हुए खरीद करता है, जो किसान दस दिन पहले से धान को मंडी में लाया है। उसमें नमी बता कर छोड़ दी जाती है। वे लोग आठ-दस दिन से मंडी में पड़े हैं, लेकिन फसल को खरीदने के लिए कोई नहीं आ रहा, जिससे बात करते हैं, पैसे की मांग करता है।
- ईशपाल राणा, किसान


किसान सभा देगी धरना
सरकार और प्रशासन किसानों की बेबसी पर ध्यान नहीं दे रहा है। लोग दस-दस दिन से मंडियों में धान की रखवाली कर रहे हैं। उचाना मंडी से कुछ किसानों ने धान उठाई भी है। इससे साफ है कि मंडियों में धान की बेकद्री हो रही है। नमी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है, जबकि एजेंसियों के पास नमी मापने के यंत्र तक नहीं हैं। इसके विरोध में अखिल भारतीय किसान सभा जिला भर की मंडियों में सोमवार से धरना शुरू करेगी।
- फूल सिंह श्योकंद्र, प्रदेश उपाध्यक्ष किसान सभा।

      
किसान धान को सूखाकर लाएं। निर्धारित नमी से अधिक नमी होने की सूरत में खरीद एजेंसियां को धान खरीदने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए किसानों को धान सूखाकर व साफ करके ही मंडियों में लानी चाहिए। किसानों को फसल बेचने के कार्य में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को मंडियां आवंटित की गई हैं। आढ़तियों को भी अपनी दुकान में धान को साफ करने वाले झरनों इत्यादि की समुचित व्यवस्था रखनी चाहिए।
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- विनय सिंह, डीसी जींद


 
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