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Jind News: ज्येष्ठ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पांडु पिंडारा तीर्थ में लगाई श्रद्धा की डुबकी

Sat, 20 May 2023 12:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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19जेएनडी24: पिंडारा तीर्थ में डुबकी लगाते हुए श्रद्धालु।  संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। धार्मिक दृष्टि से प्रति माह अमावस्या का विशेष महत्व होता है लेकिन शुक्रवार को ज्येष्ठ माह की अमावस्या विशेष संयोग में आई। अमावस्या पर शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत भी रखा गया।
इसके अलावा 30 साल बाद ज्येष्ठ अमावस्या पर शोभन योग का संयोग भी बना। ऐसे में यह संयोग शनि देव और पितरों को प्रसन्न करने के लिए विशेष रहा। जिसके चलते पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया और पिंडदान कर पितृ तर्पण किया और सुखद भविष्य की कामना की। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर वीरवार शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। वीरवार की पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन आदि का आयोजन चलता रहा।
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शुक्रवार को तड़के से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान और पिंडदान शुरू कर दिया था। इस मौके पर दूर दराज से आएं श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की। पिंडतारक तीर्थ के संबंध में कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस्या के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं ने यहां खरीदारी भी की।

जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती भी मनाई गई है। माना जाता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन तर्पण करने से पितृ सबसे ज्यादा प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा शोभन योग भी रहा। इस दिन दान करने से 100 गुणा फल मिलता है।
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आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि ब्रह्मांड के सर्वोच्च न्यायाधीश हैं सूर्य पुत्र शनिदेव। भगवान महादेव के परम भक्त हैं शनिदेव। ब्रह्मचर्य की मूरत हैं शनिदेव। भगवान शनिदेव जिन पर कृपा करते हैं उनके यहां अन्न-धन के भंडार भरपूर हो जाते हैं और बाबा उनकी संपूर्ण कामनाओं को पूर्ण कर देते हैं। आचार्य पवन शर्मा माता वैष्णवी धाम में शुक्रवार को शनि जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित धार्मिक समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
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