12जेएनडी34: कथावाचन करते हुए कथावाचक। स्रोत ग्रामीण।
नरवाना। गांव दबलैन स्थित डेरा बाबा फकीरां वाला में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के छठे दिन वीरवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम डेरा महंत हरिओम भारती के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है।
कथा के छठे दिन कथावाचक बाल योगी रंजना नंद दास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। भजनों की प्रस्तुति के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु झूमते नजर आए। छठे दिन की कथा में गांव के समाजसेवी तेजपाल शर्मा अपनी धर्मपत्नी प्रेम कुमारी के साथ यजमान बने।
रंजना नंद दास महाराज ने बताया कि विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानती थीं। उन्होंने श्रीकृष्ण के पराक्रम, करुणा और धर्म रक्षा के गुणों के बारे में सुन रखा था। धीरे-धीरे उनका मन पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो गया और उन्होंने उन्हें अपना सर्वस्व मान लिया।
उन्होंने बताया कि रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने उनका विवाह चेदि नरेश शिशुपाल के साथ करने का निर्णय लिया लेकिन रुक्मिणी इस विवाह के लिए तैयार नहीं थीं। तब उन्होंने एक ब्राह्मण के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और उनसे आकर उनका हरण करने की प्रार्थना की। जब रुक्मिणी देवी मंदिर में पूजा करने गईं, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण वहां पहुंचे और उन्हें अपने रथ पर बैठाकर ले गए।
यह दृश्य देखकर वहां उपस्थित लोग आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद रुक्मी सहित कई राजाओं ने श्रीकृष्ण का पीछा किया, लेकिन भगवान ने सभी को पराजित कर दिया और द्वारका में विधि-विधान से रुक्मिणी विवाह संपन्न हुआ। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर भाव-विभोर हो गए। भजन-कीर्तन के बीच पूरा पंडाल भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। कथा के अंत में आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।