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विकसित होंगे पांडू पिंडारा के धार्मिक घाट, रानीतालाब में लगेंगी लाइट्स

Sun, 27 Sep 2015 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
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जिले के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब जींद को पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इसके लिए जिला प्रशासन ने खास योजना तैयार की है। योजना के तहत जिले के सभी महाभारत कालीन स्थलों, ऐतिहासिक रानी तालाब और जींद रियासत की पहचान किलाजफरगढ़ गांव में पर्यटन केंद्र बनाए जाएंगे।
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तमाम धार्मिक और ऐतिहासिक विशेषताओं को संजाए हुए जींद जिला पर्यटन के रूप में विकसित नहीं हो पाया है। लेकिन अब इस कमी को पार पाने के प्रयास जिला प्रशासन ने शुरू कर दिए हैं। अगर जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई योजना के अनुरूप काम हुआ तो क्षेत्र को नई पर्यटन पहचान बनेगी। दरअसल, धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों पक्षों से समृद्ध होने के कारण यहां पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं।

रानी तालाब का जीर्णोद्धार
रानी तालाब को जींद की पहचान माना जाता है। जींद रियासत के राजा स्वरूप सिंह के समय में इसका निर्माण करवाया गया। करीब चार एकड़ में तालाब के बीच में मंदिर है। प्रशासन ने करीब छह करोड़ रुपये की लागत से इसका जीर्णोद्धार किया है। नए रूप में आने के बाद रानीतालाब में पानी डाला जाएगा और आकर्षक लाइट्स से सजाया जाएगा। इसका काम अंतिम चरण में है। पर्यटकों के लिए रानी तालाब के चारों ओर रेलिंग लगाकर फुटपाथ बनाया गया है।
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महाभारत कालीन स्थल
शहर के साथ लगते पांडू पिंडारा और ईक्कस गांव स्थित ढुंढु तीर्थ महाभारत कालीन स्थल हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन आने वाले इन स्थानों का अभी तक ज्यादा विकास नहीं हो पाया है। पिंडारा तीर्थ में हर अमावस्या को लोग स्नान के लिए आते हैं। सोमवती अमावस्या तथा सूर्य ग्रहण के मौके पर यहां स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पितृ की तर्पण के लिए सोमवती अमावस्या को पिंडदान की योजना बनाई। लेकिन उस समय सोमवती अमावस्या का योग नहीं बना। इसके लिए पांडव पिंडारा में ही रुके थे। अब यहां ओपर एयर थियेटर का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, यहां मौजूद प्राचीन मंदिरों के रखरखाव पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं, ढुंढु तीर्थ अभी तक विकसित नहीं हो पाया है।

किलाजफरगढ़ का किला
किलाजफरगढ़ गांव में बने किले को जींद रियासत के लिए अतिमहत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि अब यह खंडहर हो चुका है, लेकिन इसके विकास की योजना बनाई जा रही है। जींद के इतिहास को अपने हाथों से संजोने वाले हाउसिंग बोर्ड निवासी गुलशन भारद्वाज के अनुसार, 1857 के बाद लिजवाना कलां के लोगों ने जींद रियासत के खिलाफ बगावत कर दी थी। लोगों की बगावत को कुचलने के लिए जींद रियासत के राजा स्वरूप सिंह ने किलाजफरगढ़ में किले का निर्माण करवाया था। यहां ब्रिटिश साम्राज्य और जींद रियासत की सीमा भी होती थी। यह जींद रियासत का सैनिक किला था। इसके भी विकसित करने की योजना है।

बीड़ बड़ावन में बनेगा रमणीक स्थल
शहर के पश्चिमी छोर पर करीब 11 हजार एकड़ में फैले बीड़ बड़ावन में रमणीक स्थल बनाने की सरकार की योजना है। करीब दो माह पहले अपने जींद दौरे के दौरान प्रदेश के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने इसकी घोषणा की थी। हालांकि अभी इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हुआ है।

जींद में महाभारत कालीन काफी स्थल हैं। इनको विकसित किया जाएगा। रानीतालाब का काम करीब पूरा हो चुका है। किलाजफरगढ़ के लिए भी प्रशासन योजना बना रहा है। इसके बाद जींद पर्यटन केंद्र के रूप में भी उभरेगा।
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अजीत बालाजी जोशी, डीसी
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