मकान के आगे से तुड़वाए गए चबूतरे।
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हलके के खरैंटी गांव में अवैध कब्जों को हटाने के अभियान की शुरूआत महिला सरपंच ने अपने ही परिवार के मकानों का तुड़वाकर की। गांव की सरपंच सुनीता देवी ने गलियों में वर्षों से हुए अवैध कब्जों को हटाकर एक मिशाल कायम की है। गलियों से अवैध कब्जे हटाए जाने के बाद से गांव की गलियां खुली-खुली नजर आने लगी हैं। गौरतलब है कि लगभग चार हजार की आबादी वाले गांव खरेंटी में भी अन्य गांवों की तरह लोगों ने गलियों में पक्के चबूतरे और लेटरिन बनाकर गलियों में अवैध कब्जा कर रखा था। गलियों में चबूतरे व लेटरिन बनाए जाने के कारण गलियां तंग हो गई थीं। इससे यहां से वाहन निकालने में ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इससे गांव में लड़ाई-झगड़े का डर भी बना रहता था। वहीं गलियों में अवैध कब्जे होने के कारण गलियों के निर्माण कार्य में भी बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसके चलते गांव की कई गलियों अभी तक कच्ची ही पड़ी थी। गांव की इस समस्या को देखते हुए सरपंच सुनीता देवी ने गांव में सबसे पहले अवैध कब्जे हटवाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया। ताकि गलियों का निर्माण करवाया जा सके। हालांकि अभियान के शुरूआती दौर में कुछ जगहों पर लोगों ने सरपंच द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का विरोध भी किया लेकिन महिला सरपंच ने लोगों के विरोध को नजरअंदाज करते हुए अभियान को नियमित रूप से आगे बढ़ाया। गलियों से अतिक्रमण हटाए जाने के बाद गलियां खुली-खुली नजर आ रही हैं।
विकास में सबसे बड़ी समस्या हैं अवैध कब्जे
12वीं पास महिला सरपंच सुनीता देवी का कहना है कि गांव के विकास कार्य में अवैध कब्जे सबसे बड़ी समस्या हैं। अवैध कब्जों के कारण ही गांव में विकास कार्य सही रूप से नहीं हो पा रहे थे। अवैध कब्जे हटवाने की शुरुआत उन्होंने अपने ही परिवार के सदस्यों से की। सबसे पहले अपने परिवार के सदस्यों के चबुतरे तुड़वाए और इसके बाद इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। गांव में विकास कार्यों को करवाने के लिए सबसे पहले गांव के सभी अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे। ताकि अवैध कब्जों के कारण गांव के विकास कार्य प्रभावित नहीं हो सकें।