जींद। प्रशासन की लापराही सड़क पर घूम रहे बेसहारा पशुओं पर भारी पड़ रही है। रोजाना 10 से अधिक बेसहारा पशु सड़क हादसों में घायल हो रहे हैं, मगर उनको इलाज के लिए पशु अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई प्रबंध नहीं है।
सूचना मिलने पर गो सेवा दल के सदस्य घायल पशुओं की मरहम-पट्टी तो कर देते हैं, लेकिन गंभीर रूप से घायल पशु को सही से उपचार नहीं मिल पाता है, जिससे वह दम तोड़ देते हैं। नगर परिषद के पास घायल पशुओं को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं है। नप ने केवल घायल पशुओं को उठाने के लिए टेंडर दिया हुआ है। जब किसी पशु के घायल होने की सूचना दी जाती है तो वहां कोई मौके पर नहीं पहुंचता। इससे घायल पशु इलाज के अभाव में दम तोड़ देता है।
नप कर्मचारियों की लापरवाही को लेकर गो सेवा दल के सदस्य रोष जता चुके हैं, लेकिन उन पर इसका कोई ्सर नहीं हुआ। कर्मचारियों की लापरवाही से रोजाना बेसहारा पशु दम तोड़ रहे हैं। ज्यादातर हादसे रात के समय में हो रहे हैं। जिले में करीब चार हजार लावारिस पशु घूम रहे हैं। यह सड़कों के किनारे ही रहते हैं। इनसे हो रहे हादसों में लोग भी घायल हो रहे हैं। घायलों को तो अस्पताल पहुंचा दिया जाता है, लेकिन घायल पशुओं को पशु अस्पताल या गोशाला तक पहुंचाने का कोई प्रबंध नहीं करता।
गोहाना और सफीदों रोड पर ज्यादा हादसे हो रहे
शहर के गोहाना और सफीदों रोड पर बेसहारा पशुओं की वजह से रोजाना हादसे हो रहे हैं। शहर के मुख्य रास्ते होने के कारण इन दोनों मार्गों पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। वहीं इन दोनों रास्तों पर बेसहारा पशुओं की संख्या भी ज्यादा रहती है। शहर के अंदर इन सड़कों पर अलग-अलग झुंड में पशु बैठे रहते हैं। वाहनों की लाइट लगने के कारण वाहन चालकों को सड़कों पर बैठे बेसहारा पशु दिखाई नहीं देते। इससे वह बेसहारा पशुओं से टकरा जाते हैं। ज्यादातर हादसे दोपहिया वाहन चालकों के साथ होते हैं। रात के समय बेसहारा पशु दिखाई भी नहीं देते और कभी-कभी तो सड़क किनारे से अचानक सड़कों पर आ जाते हैं, जो हादसों का कारण बनते हैं।
खुद के खर्च पर कर रहे पशुओं का उपचार
गो सेवा दल के प्रधान भूपेंद्र शर्मा ने कहा कि लावारिस और घायल पशुओं की मदद के लिए प्रशासन और नगर परिषद का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।बेसहारा घायल पशुओं को पशु अस्पताल तक छोड़ने के लिए एंबुलेंस नहीं है। नगर परिषद ने केवल उठाने के लिए टेंडर दिया हुआ है, लेकिन कहीं भी हादसा होने की सूचना देने के बाद भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचते हैं। गो सेवा दल खुद शहर और आसपास के इलाकों में अस्थायी पशु उपचार केंद्र चला रहा है, जिसमें घायल पशुओं के इलाज पर हर माह दो-तीन लाख रुपये का खर्च आ जाता है। यह राशि दल के सदस्य मिलकर वहन करते हैं। प्रशासन की तरफ से उनको कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। प्रशासन सरकारी पशु अस्पताल में लाने पर ही पशुओं का इलाज करवा रहा है, जबकि नगर परिषद घायल पशु को वहां तक पहुंचाने की व्यवस्था ठीक ढंग से नहीं कर पा रहा है।
नगर परिषद के पास घायल पशुओं को उठाने के लिए एंबुलेंस नहीं है। केवल घायल पशुओं को उठाने के लिए टेंडर दिया गया है। हादसे की सूचना मिलते ही कर्मचारी मौके पर पहुंच जाता है और घायल पशु को अस्पताल पहुंचाता है। -डॉ. राज सैनी, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद, जींद।
05जेएनडी09-शहर में हादसे के बाद घायल पशु का इलाज करते गो सेवा दल के सदस्य। संवाद