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सीएम की घोषणा के बावजूद छह साल बाद भी शहर में नहीं लगी तीसरी आंख

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शहर का सबसे व्यस्त क्षेत्र पटियाला चौक। संवाद। - फोटो : Jind
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जींद। शहर में तीसरी आंख के पहरे की फाइलें छह साल बाद भी धूल फांक रही हैं। वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की थी लेकिन आज तक इसका कोई पता नहीं है कि फाइल किस स्तर पर है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद 20 जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए सवा करोड़ रुपये के टेंडर लगाए गए थे लेकिन आज तक शहर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए हैं। उचाना में सीसीटीवी कैमरे लग गए हैं, एक-दो दिन में इसका ट्रॉयल होगा।
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शहर में काफी समय से सीसीटीवी कैमरे की कमी खल रही है। बिना सीसीटीवी कैमरों के अपराधियों की पहचान कई बार मुश्किल हो जाती है। यदि सीसीटीवी कैमरें हों तो अपराधियों तक पहुंचना काफी आसान हो जाता है। कई बार छोटी-छोटी वारदात ऐसी हो जाती हैं, जिसमें पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती। यदि सीसीटीवी कैमरें हो तो इन अपराधियों को पकड़ा जा सकता है। 2016 में मुख्यमंत्री ने शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की घोषणा की थी और इसकी जिम्मेदारी नगर परिषद को सौंपी गई थी। नगर परिषद को पुलिस के साथ मिलकर यह योजना सिरे चढ़ानी थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शहर में 20 जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए टेंडर भी लगाए लेकिन आज तक यह योजना फाइलों में ही धूल फांक रही है। अभी इस योजना के बारे में नगर परिषद को भी कोई पता नहीं है। 17 अगस्त को हुई नगर परिषद की बैठक में शहर के विकास के लिए 44 प्रस्ताव पास किए गए। इनमें सीसीटीवी से संबंधित कोई भी प्रस्ताव नहीं था।
चोरी की वारदात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं सीसीटीवी
कई बार बाजार में दिन में ही चोरी की वारदात हो जाती हैं। दो महीने पहले पालिका बाजार में भीड़ के कारण एक महिला के बैग से 20 हजार रुपये निकाल लिए गए। बाजार में यदि सीसीटीवी होते तो चोर का पता लगाया जा सकता था। इसी प्रकार गोहाना रोड पर ऑटो में बैठी महिलाओं के भी कई बार पर्स चोरी हो चुके हैं। सबसे व्यस्तम पटियाला चौक की दुकानों से भी कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। यहां एक किराना की दुकान से तीन महीने पहले 40 हजार रुपये दिन में ही कोई चोरी कर ले गया। देवीलाल चौक पर स्थित एटीएम को छह महीने पहले उखाडने का प्रयास किया गया था। यदि मुख्य सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे होते तो आरोपियों की पहचान हो सकती थी।
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दुकानों के अंदर लगे हैं कैमरे
शहर में काफी दुकानदारों ने अपनी दुकानों के अंदर कैमरे लगावाए हुए हैं। जब वारदात दुकान के अंदर होती है तो इसमें सीसीटीवी काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं लेकिन जब वारदात दुकान के बाहर होती है और इसमें सीसीटीवी की कमी काफी खलती है। कई बार शहर के व्यापारियों ने भी सीसीटीवी कैमरे लगवाने की मांग की है, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ है।
डेढ़ साल पहले पांच लाख रुपये हुए थे खराब
तांगा चौक व्यापार संगठन के प्रधान सुनील वशिष्ठ ने कहा कि डेढ़ साल पहले नगर परिषद ने तांगा चौक पर पांच लाख रुपये खर्च करके कुछ कैमरे लगवाए थे। यह कैमरे तीन दिन भी नहीं चले। 0 कैमरे लगवाने के लिए प्रशासन की नीयत नहीं थी। इन कैमरों पर केवल 20 हजार रुपये के आसपास खर्च आया था। इतने सस्ते कैमरे तीन दिन ही चलेंगे। कैमरों के लिए जो बजट हो, वह कैमरों पर ही खर्च होना चाहिए।
शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए काफी समय पहले नगर परिषद ने प्रयास किए थे लेकिन अब यह कार्य पुलिस को करना है। पुलिस ही कैमरे लगाने के लिए प्वाइंट निर्धारित करेगी। यदि इसके बावजूद भी कोई प्रपोजल है तो उसका पता किया जाएगा।
-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद।
इस मामले में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उच्चाधिकारियों से बातचीत करके पुलिस को कैमरे लगाने के लिए प्वाइंट निर्धारित करने के आदेश दिए थे। जल्द ही इसके लिए बजट मिल जाएगा। पुलिस ने प्वाइंट निर्धातिर कर दिए हैं, जिनकी संख्या 200 से अधिक है। बजट मिलते ही सीसीटीवी लगाने का कार्य नगर परिषद को सौंप दिया जाएगा। उचाना में कैमरे लग चुके हैं। एक-दो दिन में इनका ट्रॉयल लिया जाएगा। जींद में जल्द ही कैमरे लग जाएंगे।
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-नरेंद्र बिजरानिया, एसएसपी, जींद।
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