जींद। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में चलाए जा रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान की समीक्षा शुक्रवार को लघु सचिवालय सभागार में डीसी मोहम्मद इमरान रजा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में की गई।
बताया गया कि अभियान के तीसरे चरण के तहत अब तक जिले में 48 विशेष स्वास्थ्य कैंप लगाए जा चुके हैं जिनमें 66 हजार 523 लोगों की स्क्रीनिंग कर संभावित मरीजों की पहचान की गई है।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को गंभीरता से लेते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को समय पर प्राप्त किया जा सके।
बैठक से पहले एएस एंड एमडी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को अभियान से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि टीबी केवल स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारी नहीं बल्कि एक सामाजिक चुनौती भी है। इसे समाप्त करने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों, नगर निकायों, पंचायत राज संस्थाओं और आमजन को अभियान से जोड़ने और गांवों और वार्ड स्तर तक जागरूकता गतिविधियां तेज करने के निर्देश दिए।
डीसी ने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों, झुग्गी बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में स्क्रीनिंग एवं जांच गतिविधियों को और तेज किया जाए। संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर जांच के तुरंत बाद उपचार शुरू किया जाए और मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग और फॉलोअप किया जाए ताकि कोई भी मरीज बीच में दवा न छोड़े। उन्होंने निक्षय पोषण योजना के तहत पात्र मरीजों को समय पर पोषण सहायता और राशन उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए।
डीपीसी संदीप गोयत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कैंपों में फ्री एक्स-रे, बलगम जांच, सीवाई-टीबी, बीपी और शुगर की जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बलगम में खून आना, वजन कम होना, भूख न लगना, शाम के समय बुखार, रात में पसीना आना और कमजोरी महसूस होना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए। बैठक में डॉ. विनीता और डीपीपीएमसी कोमल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।