सफीदों। हरियाणा में जिलों के गठन के लिए कमेटी बनाने के बाद सफीदों को जिला बनाने की मांग फिर से मुखर हो गई है। इसको लेकर नगर के प्रबुद्ध लोगों ने सफीदों शहर स्थित अग्रवाल पंचायती में शनिवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सफीदों को जिला बनाने की मांग की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 22 दिसंबर को सामाजिक, धार्मिक संगठनों, राजनीतिक लोगों, सामान्य लोगों की बैठक नगर के रामलीला मैदान में बुलाई गई है।
बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाएगा तथा आवश्यक सुझाव लिए जाएंगे। उन्होंने लोगों से आह्वान किया वे हर प्रकार की राजनीति से ऊपर उठकर संगठित होकर इस मुहिम में शामिल हों।
लोकतंत्र सेनानी रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व पालिका प्रधान मनोज दीवान ने कहा कि यह लड़ाई राजनीति से ऊपर उठकर सफीदों के अस्तित्व को बचाने की है। सफीदों को जिला बनाया जाना पूरी तरह से वाजिब है। इसके लिए हरसंभव प्रयास व लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि सफीदों ऐतिहासिक नगरी है। इसका महाभारतकालीन सभ्यता में विस्तृत वर्णन है। यहां पर ऐतिहासिक महाभारतकालीन नागक्षेत्र सरोवर व मंदिर आज भी विद्यमान हैं, जोकि सफीदों क्षेत्र की पौराणिकता को दर्शाते हैं। लोगों का कहना है कि सफीदों में डाकसेवा 1885 में ब्रिटिश सरकार से संधि करके शुरू की गई थी। सन् 1889 में यहां पहला अपर प्राइमरी स्कूल बन गया था।
1914 में यहां को ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी शुरू हो गई थी। जींद-पानीपत रेल सेवा वर्ष 1916 में शुरू हुई तथा सफीदों में रेलवे स्टेशन का निर्माण 1931 में हो गया था। यहां पर एलोपैथिक डिस्पेंसरी 1918 में प्रारंभ हो गई थी। 1971 में इसे अस्पताल का दर्जा मिला था। सफीदों में अनाज मंडी की स्थापना 1920 में हो गई थी तथा यहां नगरपालिका 1938 में बन गई थी। सन 1952 में सफीदों विधानसभा क्षेत्र बना था और सन 1968 में सफीदों तहसील बन गई थी।
सन 1975 में यहां न्यायालय की स्थापना हो गई और सन 1980 में सफीदों सब डिवीजन बन गया था।
विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिला उपाध्यक्ष संजीव गौतम ने कहा कि जब रियासतों को समाप्त करके उनका विलय भारत में किया गया तो रियासत जींद को सबसे पहले 15 जुलाई 1948 को भारत के एक नए राज्य पेप्सू में मिला दिया गया।
तब संगरूर जिला बना तथा सफीदों इस जिले में शामिल था। एक नवंबर 1966 को जब हरियाणा अस्तित्व में आया तब जींद, सफीदों एवं दादरी हरियाणा में आ गए, मगर संगरूर पंजाब में ही रह गया था। उस समय जिला जींद बन गया तथा सफीदों को तहसील बना दिया गया था। इस तरह सफीदों की उत्पत्ति एवं अस्तित्व बहुत पौराणिक है। ऐसे में जिला बनाए जाने का पहला हक सफीदों का बनता है।
इस अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण संसद सोमदत्त शर्मा व विनोद मिश्रा, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरीश वशिष्ठ, वरिष्ठ नागरिक मित्र मंडल से यशपाल सूरी व चेतनदास, भारत विकास परिषद घनश्याम राणा, पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष श्यामलाल गुज्जर, अपना परिवार से होशियार शर्मा, एडवोकेट प्रदीप कौशिक मौजूद रहे।
21जेएनडी18: पत्रकारों से बातचीत करते हुए लोकतंत्र सेनानी रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व पालिका प्रधान