नागरिक अस्पताल के कर्मियों की लापरवाही से एंबुलेंस में डिलिवरी होने का मामला सामने आया है। जच्चा के परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला डाक्टर तथा नर्सों ने उस समय रेफर किया जब उसकी डिलिवरी होने वाली थी।
परिजनों का कहना है कि इस दौरान जच्चा व बच्चा की जान को खतरा हो सकता था। एंबुलेंस में डिलिवरी होने के बाद फिर से उनको नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने उनको थोड़ी देर रखकर फिर से पीजीआई खानपुर रेफर कर दिया। परिजनों ने मामले की जांच करवाने की मांग की है।
सफीदों के वार्ड सात निवासी की जेठानी कविता, देवर बबलू ने बताया कि गर्भवती महिला पिंकी को सफीदों के नागरिक अस्पताल में प्रसव पीड़ा होने पर दाखिल करवाया गया था। इस दौरान वहां मौजूद महिला डाक्टर व नर्सों ने उसे दाखिल करवा लिया।
लेकिन जब डिलिवरी का टाइम आया तो उसे जींद नागरिक अस्पताल में ले जाने की बात कही। लेकिन परिजनों ने उसे खानपुर ले जाने की मांग की। महिला को एंबुलेंस में लेकर निकले ही थे कि दो किलोमीटर दूर रास्ते में ही रत्ताखेड़ा के पास महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ गई और एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि नर्स को पता था कि महिला को जल्द ही डिलिवरी होनी है, उसके बावजूद उन्होंने वहां से उसे रेफर कर दिया।
फोन करते ही पहुंची एंबुलेंस-चालक
एंबुलेंस चालक सतीश ने कहा कि उनके पास पहले जींद जाने के लिए फोन आया था। जिसके बाद वे जच्चा को जींद के लिए लेकर चले थे। बाद में खानपुर रेफर करने की बात कही गई। तभी उन्होंने हाट रोड से खानपुर जाने के लिए एंबुलेंस ले जाना चाहा तो गांव रत्ताखेड़ा के पास पहुंचते ही महिला की डिलीवरी होने लगी। जिसके बाद इएमटी संदीप ने डिलिवरी के दौरान सहयोग किया। फोन करने के बात कुछ ही देर में एंबुलेंस अस्पताल पहुंच चुकी थी। इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
परिजनों ने अस्पताल में ही लगा दिया अधिक समय-नर्स
नर्सिंग कक्ष में मौजूद नर्स वर्षा ने कहा कि परिजनों द्वारा ही अस्पताल में अधिक समय लगाया गया। उन्होंने गर्भवती महिला को खानपुर के लिए रेफर किया था। लेकिन रास्ते में ही डिलिवरी हो गई।
महिला रोग विशेषज्ञ डा. प्रीति ने कहा कि महिला को आठवें महीने में ही प्रसव पीड़ा हो गई थी। जिसको देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद परिजनों के कहे अनुसार खानपुर रेफर कर दिया था। महिला के परिजन किसी के इंतजार में अस्पताल में बैठे रहे। करीब एक घंटे के बाद तक भी वे लोग नहीं गए। उन्हें बार-बार जींद जाने के लिए बोला गया, लेकिन वे लोग फिर भी खानपुर के लिए निकले। जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, दोनों का उचित इलाज देकर खानपुर के लिए भेज दिया गया है।