27 सफीदों 1 गांव हाट में आठवें दिन धरने पर बैठे किसान व ग्रामीण। संवाद
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जींद। सेवानिवृत्त डीआईपीआरओ सुरेंद्र वर्मा कोथ ने गांव झील में जरूरतमंद परिवार की सातवीं कक्षा की छात्रा लक्ष्मी को आर्थिक सहायता देकर उसका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि बेटियां पराई नहीं होतीं बल्कि शिक्षा और संस्कार मिलने पर वही माता-पिता के बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी बनती हैं। इसलिए बेटियों को बोझ समझने के बजाय उन्हें पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहिए।
लक्ष्मी के परिवार ने बताया कि उसकी मां संतोष ने गरीबी के बावजूद अपनी मां छबीली की करीब 15 वर्षों तक सेवा की। विवाह के बाद भी वह अपनी मां को अपने पास रखती थी और करीब चार वर्ष तक बिस्तर पर रहने के दौरान उनकी देखभाल की।
संतोष और उसके पति राजेश उर्फ राजा सोनी ने मिलकर छबीली की सेवा की। परिवार के बुजुर्ग ज्ञानीराम और सुकमा देवी ने कहा कि संतोष ने अपने संस्कारों से साबित किया कि बेटियां माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकती हैं। इस मौके पर पुरुषोत्तम सोनी, संजीव सिवाहा, राजेंद्र सोनी, रमेश सोनी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। संवाद