संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। बारिश और ओलों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिले में गेहूं और सरसों की फसल को जबर्दस्त नुकसान हुआ है। थोड़ा मौसम खुलने पर किसान खेत में बारिश में भीगी फसल को सुखाने में जुटा है लेकिन उसे उत्पादन गिरने की चिंता है। पकी हुई सरसों की फसल गिर गई। गेहूं की बालियां टूट गईं। अब मायूस अन्नदाता क्षतिग्रस्त फसल के मुआवजे के लिए आवेदन जमा करने के लिए लाइन में लगने को मजबूर है। उसे ये भी भरोसा नहीं कि उसे मुआवजा मिलेगा भी या नहीं। जिले में अब तक करीब 4572 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। पंजीकरण करने की प्रक्रिया जारी है।
शहर के किसान सदन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फार्म भरने के लिए जिले के सैकड़ो किसान पहुंचे। हालत ये थी कि कार्यालय खुलने से पहले ही सुबह सात बजे से किसान यहां पहुंचने लगे थे। भूखे प्यासे किसान सुबह सवेरे घर से निकल गए थे। बुधवार को करीब 1968 किसानों का सरसों और गेहूं की फसल के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से किया गया है। जिले के 1726 किसानों ने गेहूं का पंजीकरण पोर्टल पर करवाया तो 242 किसानों ने सरसों फसल का पंजीकरण क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज करवाया।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दो तरह से किसानों को मुआवजा देती है। इसमें कटी हुई फसल व खड़ी हुई फसल जो आपदा में खराब हो गई हो। इस दौरान किसान फोटो, प्रार्थना पत्र की आईडी, आधार कार्ड, पॉलिसी पेज नंबर लेकर फॉर्म भरना पड़ता है। जिस पर विभाग ओर से बीमा कंपनी की टीम गठित की जाती है और 14 दिन में सर्वे करने के बाद संबंधित किसान को मुआवजे की राशि दी जाती है। जिला कृषि सहायक सांख्यिकी अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि पंजीकरण होने के 10 से 15 दिन के अंदर तीन कमेटी मेंबर बनाए जाते हैं। जिसमें खंड कृषि अधिकारी , बीमा कंपनी का प्रतिनिधि व स्वयं किसान होता है और वह अपना सर्वे करने के बाद बीमा एजेंसी किसान को मुआवजा देने का काम करती है। पहले फसल का फोटो नहीं लिया जाता था और अब फसल का फोटो भी लिया जा रहा है। जिसके चलते उन्हें दोबारा से खेतों में जाकर फसल का फोटो लाना पड़ेगा ।