04जेएनडी14: महाराजा अग्रसेन मंदिर में आयोजित भजन-कीर्तन में पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
उचाना। महाराजा अग्रसेन मंदिर पुजारी अशोक शर्मा ने साप्ताहिक प्रवचन करने में कहा कि मधुर वाणी आत्मा का सद्गुण है। दूसरों की निंदा करना, अप्रिय भाषा प्रयोग करना जीवन में विषय है। जो हमारे आत्मिक गुणों का नष्ट कर देता है। कोई किसी की निंदा करता है, वह पाप की निंदा न करके किसी व्यक्ति की निंदा कर रहा है तो जीवन में अशुभ कर्मों का अर्जन कर रहा है। वह निंदक कर्म का अपने जीवन में निमंत्रण कर रहा है। पाप की निंदा करो।
किसी व्यक्ति की निंदा मत करो। पाप को बुरा समझने वाला कभी पापानुगामी नहीं बनता। निंदा करने वाले मन का मलिन बन जाता है। निंदा त्याग ने वाला मन पवित्र रहता है। मानव जीवन श्रेष्ठ है। इसमें पुष्पों की तरह सुगंध का वास हो ऐसा प्रयत्न करो। उन्होंने कहा कि जीवन में स्वर्ग और नरक विद्यमान है। जीवन सम्यक प्रकार से जीया जाए तो स्वर्ग का सुख मिलता है। जीवन में बुराई पंसद है तो जीवन नरक बन जाता है।
जहां कष्ट, दुख मिलते है। जीवन में क्रोध है, व्यवहार प्रेम नहीं है, स्वभाव क्रोधी है तो जीवन नरक है। प्रेम है तो जीवन स्वर्ग है। व्यसन मुक्त जीवन रखो व्यसनों से जीवन कभी सुखी नहीं बना। अपना स्वभाव मधु रखो। व्यक्ति का अहंकार स्वभाव को दूषित कर देता है। कभी भी किसी के सामने अपने गुप्त रहस्यों को प्रकट मत करो। क्योंकि दर्द हमेशा अपने ही देते है वरना गैरों को क्या पता आपको तकलीफ किस बात से होती है।